उत्तर प्रदेश से मानसून के लौटने की गति पड़ी सुस्त, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही वापसी की रेखा बरकरार
पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चक्रवातीय गतिविधियों के कारण मानसून की वापसी की गति धीमी पड़ गई है। तीन ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश में मानसून की वापसी पर लगा ब्रेक, चक्रवातीय असर से धीमी हुई गति।
HighLights
पूर्वांचल में तीन दिनों से चक्रवातीय बादलों की सक्रियता बनी हुई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून की वापसी की रेखा स्थिर है।
चक्रवातीय हालातों से तेज हवाएं, बारिश और तापमान में गिरावट।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पूर्वांचल में चक्रवातीय बादलों की सक्रियता का रुख तीन दिनों से बना हुआ है और इतने ही दिनों से मानसून के वापसी का दौर ठिठका हुआ है। लौटता हुआ मानसून तीन दिनों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही बरकरार है। मानसून के बापसी का दौर ठहरने और पूर्वांचल में चक्रवातीय तूफान का असर होने से माना जा रहा है कि मानसून के वापसी की गति पर भी यह असर डालेगा।
मौसम विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार बीते बुधवार को जो मानसूनी वापसी की रेखा बनी हुई थी वह उसी स्थान पर शुक्रवार काे भी स्थिर बनी रही। तीन दिनों से इस प्रकार मानसून के वापसी की गति एक ही स्थान पर स्थिर है। जबकि पूर्वांचल में मानसूनी सक्रियता के बीच चक्रवातीय हालातों ने अंधड़ और बारिश का दौर बना रखा है। इसकी वजह से तापमान में कमी भी आई है।

वहीं पूर्वांचल से हर हालात में मानसून 10 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार मानसूनी सक्रियता के बीच चक्रवात ने मानसूनी वापसी की गति को सुस्त किया है। जबकि पूर्वांचल में यलो अलर्ट अब भी बना हुआ है। शनिवार तक मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। इसकी वजह से चक्रवातीय हालात अगले 48 घंटों तक और भी बना रह सकता है।
वहीं हर साल मानसून यूपी में पूर्वांचल के सोनभद्र के रास्ते प्रवेश करता है और वहीं से दस अक्टूबर तक वापसी करता हुआ यूपी से विदा भी हो जाता है। इस बार मानसून देर से आया और अनुमानों के विपरीत औसत के करीब बारिश कराने के बाद लौटने भी लगा था लेकिन चक्रवातीय हालातों कह वजह से मानसून के पावसी की गति सुस्त भी पड़ी है। आगे भी मौसम का रुख मानसून के वापसी को तय करेगा।
