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वाराणसी में दो किलोमीटर तक की सड़क में 400 से ज्यादा गड्ढे, 44 कालोन‍ियों के 25 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

By Raghvendra ShuklaEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 04 Oct 2026 05:53 PM (IST)

वाराणसी में टकटकपुर-बसही मार्ग सहित कई सड़कों पर 400 से अधिक गड्ढे होने से 25,000 से ज्यादा लोग परेशान हैं। ...और पढ़ें

वाराणसी में बदहाल सड़कें: 400 से अधिक गड्ढों से 25 हजार लोग परेशान।

वाराणसी में बदहाल सड़कें: 400 से अधिक गड्ढों से 25 हजार लोग परेशान।

HighLights

  1. टकटकपुर-बसही सड़क पर 400 से अधिक गड्ढे, 1.5 किमी बदहाल।

  2. 44 कॉलोनियों के 25 हजार से अधिक लोग प्रतिदिन प्रभावित।

  3. चार साल पुरानी सड़क की खराब गुणवत्ता, अधिकारी मौन।

राघवेन्द्र शुक्ल, वाराणसी। सिस्टम जो न बनाए...कहीं सही सड़क तारकोल के लेप से संवरती है तो कहीं बिना गड्ढे के ही पैच वर्क हो जाता है, लेकिन जिस सड़क को गड्ढा युक्त से मुक्त की जरूरत है वहां अनदेखी होती है। चार साल में ही सड़क धंसी और गिट्टी उखड़ गई, लेकिन जिम्मेदार मौन रहे।

सिस्टम की लापरवाही से इस मार्ग पर बाइक, नाव सरीखी दिखती है और इसके सवार पानी के हिलोरे की तरह हिचकोले...खाते हुए सफर तय कर करते हैं। तकरीबन चार सौ गड्ढों को अपने अंदर समेटे हुए 1.5 किलोमीटर की दूरी वाली टकटकपुर-बसही सड़क को जीर्णोद्धार का इंतजार है।सफर करने वाले महसूस करते हैं कि चुनाव आएगा तो सड़क चमचमाएगी। नेता जी हालचाल लेने आएंगे और साहब, रोड बनवाएंगे।

अर्दली बाजार से कचहरी तक सड़क पर टकटकपुर-बसही मार्ग जैसे गड्ढे नहीं थे, लेकिन एक माह पहले इस पर तारकोल का लेप लगा और सड़क चमचमा गई। इसी मार्ग से होकर जब लोग पंचक्रोशी , सिंधोरा, टकटकपुर-बसही की तरफ निकलते हैं तो आगे का सफर गड्ढों से बचते हुए ही तय हो पाता है। महावीर चौराहा, यातायात के नजरिए से व्यस्ततम मार्ग है।

कोने पर शिव मंदिर है। श्रद्धालु भी खूब आते हैं।चाय, समोसा, जलेबी की दुकानें हैं तो भीड़ भी लाजिमी है और यहां का चौराहा चौराहा, गड्ढा मुक्त नहीं युक्त है। गड्ढे की गहराई देखकर चालक बाइक या कार वाहन रोकते हैं और फिर बचते हुए निकलते हैं। इस वजह से यातायात सरल हो जाता है। नतीजतन यातायात सिपाही इस चौराहे पर यदा-कदा ही दिखते हैं।

पंचक्रोशी मार्ग पर बाबा अमरनाथ आश्रम के सामने डेढ़ माह पहले सड़क धंसी तो गिट्टी पड़ी लेकिन मार्ग नहीं बना। भोजूबीर-सिंधोरा मार्ग के जाम, अतिक्रमण व फुटपाथ पर कब्जे की वजह से टकटकपुर-बसही बाईपास सरीखा है, लेकिन टूटा है। एसबीआई के सामने सड़क, गड्ढे में हैं और बिजली का पोल झुका हुआ है। बसही मोड़ पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं।

यहां तो सड़क भी नहीं दिखेगी। बजरंग विहार, गांधी नगर, गांधी पार्क, श्यामनगर के दो फेस, चंद्र नगर, कलश नगर, गौतम विहार के तीन फेस सहित 44 गलियों में कालोनियां हैं और 25 हजार से ज्यादा लोग इस समस्या से हर दिन जूझ रहे हैं। खाड़ी कुआं मार्ग भी कुछ जगहों पर टूट चुका है। जबकि रेवड़ी तालाब-भेलूपुर मार्ग तकरीबन 150 मीटर तक टूटा है। सीवरेज का पानी सड़क के गड्ढों में है।

डंडे में तिरंगा...संकेत इधर खतरा है....

भारत गैस गोदाम के सामने सीवर का चैंबर गायब है। इस गड्ढे में कोई गिरा तो जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। 20 दिन पहले किसी ने लकड़ी में तिरंगा लपेटा और गड्ढे में ईंट के सहारे लगा दिया। तिरंगा संकेत देता है कि इधर खतरा है... बचकर निकलिए...।

कोई ध्यान नहीं देता है। चुनाव रहता तो सब दिखते। रोड भी बन जाता। यही सिस्टम के कार्य का तरीका है। - सत्य प्रकाश सिंह, महावीर चौराहा

चार साल पहले यह सड़क बनी थी। जब टूटी तो इसकी परत देखकर गुणवत्ता का अंदाजा लग जा रहा है। - गुड्डन सोनकर, बसही मोड़

मार्ग कई जगह से टूटा है। स्थानीय लोग परेशान हैं लेकिन विभाग इसे बनवा नहीं रहा है। - मनोज उपाध्याय, खाड़ीकुआं

पानी सड़क पर फैलता है। पानी की वजह से गड्ढे का पता नहीं चलता और बाइक सवार गिर जाते हैं। - 

गोपाल त्रिपाठी, रेवड़ी तालाब