काशी के संस्कृति संसद-2026 में जुटेंगे देशभर के 3000 से ज्यादा साधु- संत, जेन जी के भटकाव को करेंगे दूर
काशी में 3 से 5 नवंबर तक 'संस्कृति संसद 2026' आयोजित होगी, जिसमें देशभर से साधु-संत और विद्वान जुटेंगे। इसका ...और पढ़ें

काशी में संस्कृति संसद 2026: साधु-संत करेंगे जेन जी का मार्गदर्शन, 7000 युवाओं ने कराया पंजीकरण।
HighLights
काशी में 3-5 नवंबर को 'संस्कृति संसद 2026' का आयोजन।
'जेन जी कान्क्लेव' में युवाओं को मिलेगा साधु-संतों का मार्गदर्शन।
मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियां वापस लाने पर भी होगी चर्चा।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। जेन जी के भटकाव को दूर करने और उनके मन की बात को जान- समझकर साधु- महात्मा और विद्वतजन उनका मार्गदर्शन करेंगे। युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, भारतीय ज्ञान परंपरा, ग्राम्य संस्कृति और राष्ट्रधर्म का भाव जागृत करने के लिए धर्म नगरी काशी में तीन से पांच नवंबर तक देश भर के साधु- संत और विद्वान जुटेंगे।
'संस्कृति संसद 2026' में इस वर्ष मुख्य आकर्षण 'जेन जी कान्क्लेव' होगा, इसमें संत और विद्वानों नई पीढ़ी से सीधा संवाद कर उनकी जिज्ञासा शांत करेंगे और नव भारत के निर्माण में उनकी भूमिका बताएंगे।
गंगा महासभा की ओर से आयोजित संस्कृति संसद को लेकर सिगरा स्थित कैवल्य ज्ञान पीठ में प्रेसवार्ता में अखिल भारतीय संत समिति राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल दौर में युवा पीढ़ी कई मानसिक द्वंद्वों और भटकाव से जूझ रही है।
ऐसे में युवाओं के मन की बात सुनकर उनकी जिज्ञासाओं, तार्किक प्रश्नों और समकालीन शंकाओं का समाधान वैज्ञानिक व आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में दिया जाएगा। जेन जी कान्क्लेव में 90 प्रतिशत सहभागिता युवाओं की होगी। हार्दिक पटेल जैसे कई युवा नेता भी जेन जी से संवाद करेंगे। बताया कि भारतीय संस्कृति केवल धरोहर के रूप में सहेजने की वस्तु नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक विज्ञान, ज्ञान और नई पीढ़ी के दैनिक जीवन से जोड़ना समय की मांग है।
इस महामंथन का केंद्रीय उद्देश्य युवाओं में संस्कारों के बीज अंकुरित करना, नैतिक मूल्यों का संरक्षण और नव भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका तय करना है। इस दौरान अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष जगद्गुरु स्वामी अविचल देवाचार्य महाराज व संयुक्त मंत्री राधे बाबा भी मौजूद रहे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखेगी संस्कृति- संस्कार की झलक
संस्कृति संसद के तहत प्रतिदिन सुबह 10 से शाम चार बजे तक मुख्य वैचारिक सत्र आयोजित होंगे। वहीं, परिसर में रचनात्मक गतिविधियां भी होंगी। इसमें बच्चों की चित्रकला व रंगोली प्रतियोगिता और शाम को राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और संस्कार पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होगी।
7000 युवाओं ने कराया रजिस्ट्रेशन
जेन जी कान्क्लेव में शामिल होने के लिए देश भर से युवा पंजीकरण करा रहे है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि लगभग 7000 युवाओं ने पंजीकरण कराया है।
मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियां विदेशों से वापस लाने पर भी होगी चर्चा
संस्कृति संसद में विदेशों में रखी मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियों को वापस लाने पर मंथन किया जाएगा। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि वर्तमान में बाजार में उपलब्ध मनुस्मृति का स्वरूप मनगढ़ंत, भ्रामक और असत्य है। वर्ष 1793 के आसपास विलियम जोन्स द्वारा किए गए अंग्रेजी अनुवाद के बाद मूल ग्रंथों के अर्थ और संदर्भ के साथ व्यापक छेड़छाड़ की गई। भारत से प्राचीन पांडुलिपियां चोरी हो गई और अध्ययन से पता चला कि जर्मनी, चीन, कनाडा और फ्रांस के संग्रहालयों में यह पांडुलिपियां रखी हैं। इसे वापस लाने पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
साधु- संत करेंगे बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक
संस्कृति संसद में शामिल होने के बाद साधु- संतों का आगमन सोमवार को होगा। दोपहर तीन बजे से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित महारुद्राभिषेक में साधु- संत हिस्सा लेंगे।
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