वाराणसी, जेएनएन। आपको कर्मकार कार्ड बनवाने के लिए विभाग में चक्कर लगाने पड़ते और ठेकेदारों की जी हुजूरी करनी पड़ती थी। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी माह www.upssb.in वेब पोर्टल/वेबसाइट लांच की, जिसके माध्यम से आप खुद ही पंजीयन कराकर कर्मकार बन सकते हैं। पूर्ण दस्तावेज के साथ इसमें पंजीयन होने के बाद आपने अपने परिवार के साथ सरकार की योजनाओं का भरपूर लाभ ले सकते हैं। पंजीकृत कर्मकारों एवं उनके स्वजन को पांच लाख रुपये तक निशुल्क उपचार हो सकता है। वहीं मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना में कामगार की दुर्घटनावश मृत्यु/दिव्यांगता की दशा में दो लाख तक आर्थिक सहायता मिल सकती है। वहीं अन्य योजनाओं के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई एवं बेटी की शादी के लिए भी सरकार आर्थिक सहायता दे रही है।

सहायक श्रमायुक्त देवब्रत यादव ने बताया कि असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले 45 प्रकार के कर्मकार उत्तर प्रदेश राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के वेब पोर्टल/वेबसाइट www.upssb.in पर सीधे आनलाईन स्वयं अथवा कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से पंजीयन करा सकते हैं। इसके बाद वे सामाजिक सुरक्षा बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते है। पंजीयन के लिए मात्र 60 रुपये देय होगा। इसमें 10 रुपये पंजीकरण शुल्क एवं पांच वर्ष के लिए 10-10 रुपये प्रतिवर्ष अंशदान शामिल हैं।

यह दस्तावेज जरूरी

पंजीयन के लिए एक फोटो, मोबाइल नंबर (ओटीपी के लिए), आधारकार्ड, राशनकार्ड, बैंकपास बुक व नामिनी का नाम व आधार नम्बर आवश्यक अभिलेख है।

दो योजनाएं संचालित हो रही हैं

उन्होंने बताया कि वर्तमान में सामाजिक सुरक्षा बोर्ड द्वारा दो योजना संचालित है। इसमे पहला मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना जिसमें पंजीकृत सभी कर्मकार एवं उनके परिवारों को पांच लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा निःशुल्क प्रदान की जाएगी। वहीं दूसरी मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना, जिसमें कामगार की दुर्घटनावश मृत्यु/दिव्यांगता की दशा में अधिकतम दो लाख तक आर्थिक सहायता देय होगी। अगर पंजीकरण में कोई समस्या होती है वे कर्मकार अपर श्रमायुक्त कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

ये ले सकते हैं लाभ

असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम-2008 संगठित उत्तर प्रदेश असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा नियमावली-2016 में परिभाषित 45 श्रेणी के कर्मकार शामिल हैं। इसमें धोबी, दर्जी, माली, मोची, नाई, बुनकर, कोरी, जुलाहा, रिक्शा चालक, घरेलू कर्मकार, कूड़ा बीनने वाले कर्मकार, हाथ ठेला चलाने वाला, फूटकर सब्जी, फल-फूल विकेता, चाय, चाट, ठेला लगाने वाले, फूटपाथ व्यापारी, हमाल कूली, जनरेटर/लाईट उठाने वाले, केटरिंग में कार्य करने वाले, फेरी लगाने वाले, मोटर साइकिल/साईकिल मरम्मत करने वाले गैरेज कर्मकार, परिवहन में लगे कर्मकार, आटो चालक, सफाई, कामगार ढोल/बाजा बजाने वाले टेन्ट हाउस में काम करने वाले, मछुआरा, तांगा/बैल गाड़ी चलाने वाले, अगरबत्ती (कुटीर उद्योग) बनाने वाले कर्मकार, गाड़ीवान, घरेलू उद्योग में लगे मजदूर, भड़भुजा (मुर्रा चना फोड़ने वाले), पशुपालन मत्स्य पालन, मुर्गी बत्तख पालन में लगे कर्मकार, दुकानों में काम करने वाले ऐसे मजदूर (जो ईपीएफ व ईएसआइ से आवर्त न हो), खेतिहर कर्मकार, चरवाहा दूध दूहने वाले, नाव चलाने वाला (नाविक), नट-नटनी, रसोइया, हड्डी बीनने वाले, समाचार पत्र बांटने वाले, ठेका मजदूर (उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत एवं बोर्ड में कार्यरत आउटसोर्सिंग के कर्मकार एवं ईएसआई व भविष्य निधि योजना में शामिल ठेका मजदूरी को छोड़कर), खड्डी पर कार्य करने वाले (सूत, रंगाई, कताई, धुलाई आदि) दरी, कम्बल जरी जरदोजी चिकन कार्य, मीटशाप व फैक्ट्री फार्म पर कार्य करने वाले, डेयरी पर कार्य करने वाले श्रमिक, कांच की चूड़ी एवं अन्य कॉच उत्पादों में स्व रोजगार कार्य करने वाले कर्मकार आवर्त होते है।

Edited By: Abhishek Sharma