वाराणसी, जागरण संवाददाता। यह दो केस सिर्फ शहर में बंदरों के आतंक को बताने के लिए है। ऐसी घटनाएं आए दिन होती हैं। संकट मोचन मंदिर के आप-पास के इलाके में बंदरों का आतंक जबरदस्त है। कबीर नगर कालोनी, जवाहर नगर, साकेत नगर, पक्के महाल, चौक, शिवपुर आदि इलाके ऐसे हैं जहां पर लोगों ने घरों की बालकनी व खिड़कियों में लोहे की जाली लगा रखा है। कहते हें कि बंदर किचन तक पहुंच जाते हैं। फ्रीज खोलकर खाने-पीने की सामग्री निकाल लेते हैं। भगाने पर हमला कर देते हैं। शहरवासियों के लिए यह बड़ी समस्या है जिसे देखते हुए हाईकोर्ट ने बंदरों को पकडऩे के लिए वन विभाग व नगर निगम को आदेशित किया है। इसके बाद भी दोनों विभाग जिम्मेदारियों को एक दूसरे पर थोपते हुए खुद को इस मसले से अलग कर रहे हैं।

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि बंदर वन्य जीव है। इसे पकडऩे की जिम्मेदारी वन विभाग की है तो वन विभाग नगर निगम को जिम्मेदार ठहरा रहा है। इस ठेलमठेल में कोर्ट का फैसला फंस गया है।

बंदर-श्वान को पकडऩे के लिए नए मदों पर लगी मुहर : नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में पुनरीक्षित बजट पर साढ़े पांच घंटे तक चर्चा के बाद पहली बार आवारा कुत्तों की नसबंदी और बंदरों को पकडऩे के लिए नए मदों का सृजन किया गया था। इससे शहर में आए दिन बंदरों और कुत्तों के आतंक से जनता को राहत मिलेगी।

ढाई साल पहले चला था अभियान : करीब ढाई साल पहले नगर निगम ने अभियान चलाया था। बंदरों को पकडऩे के लिए मथुरा से संस्था के लोगों को बुलाया गया था। पकड़े बंदरों को सोनभद्र के जंगल में छोड़ देना था लेकिन संस्था ने गंगा उस पार ही बंदरों को छोड़ दिया जिसकी जानकारी होने पर नगर निगम ने संस्था से अनुबंध खत्म कर दिया।

बोले अधिकारी : बंदर वन्य जीव होते हैं। इनको पकडऩे की जिम्मेदारी वन विभाग की होती है। कोर्ट के आदेश पर उन्हें पकडऩा चाहिए। इसमें नगर निगम की ओर से कोई मदद चाहिए तो वह दिया जाएगा। - सुमित कुमार, अपर नगर आयुक्त व प्रभारी पशु कल्याण विभाग

- कोर्ट का आदेश अब तक मेरे पास नहीं आया है। कोर्ट ने क्या आदेशित किया है, वह अवलोकन करेंगे। हां, यह जरूर है कि बंदरों को पकडऩे की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसमें कोई सहयोग चाहिए तो वन विभाग देगा। पहले भी सहयोग दिया जाता रहा है। - महावीर, प्रभागीय वनाधिकारी

केस-1 : बड़ा गणेश लोहटिया के रहने वाले धीरेंद्र जायसवाल सुबह करीब नौ बजे अपने घर की छत पर झालर लगा रहे थे। इसी बीच बंदरों के झंूड ने उन पर हमला कर दिया। बंदर से बचने के लिए वह भागे तो सीढ़ी से गिर गए।

केस-2 : कबीर नगर कालोनी में दोपहर को पंखुड़ी खेल रही थी। तभी बंदर ने हमला कर दिया। बच्ची का कान जख्मी हो गया। बंदर के हमले से कई दिनों तक बच्ची सहमी रही।

Edited By: Abhishek Sharma