वाराणसी, जागरण संवाददाता। कबीरचौरा राजकीय महिला अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता के परिवारीजनों से मिठाई के नाम पर तीन से पांच हजार रुपये तक की वसूली प्रकरण में अब दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। प्रकरण की जांच के लिए बुधवार को अस्पताल प्रशासन की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। आरोप साबित होने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

दरअसल, मंगलवार को निरीक्षण के लिए पहुंची विधानमंडल की महिला एवं बाल विकास समिति की टीम से शिकायत पर मामला उजागर हुआ था। अस्पताल में भर्ती मरीजों ने टीम को बताया कि प्रसव कक्ष से लेकर वार्ड तक में हर शिफ्ट के डाक्टर-नर्स व सफाईकर्मी मिठाई के नाम पर पैसे वसूलते हैं। कम पैसे देने वालों या पैसे न देने वालों से अभद्र व्यवहार तक किया जाता है। मरीज भर्ती होने के नाते लोग अमूमन शिकायत करने से बचते हैं। इस नाते अस्पताल में यह खेल लंबे समय से चला आ रहा था। मगर अब प्रकरण में महिला एवं बाल विकास समिति की टीम भी जल्द कमेटी गठित कर जांच कराएगी। सुबह एसआइसी डा. लिली श्रीवास्तव ने नर्सिंग स्टाफ, डाक्टर व सफाईकर्मियों को बुलाकर फटकार लगाई और सभी को नाेटिस जारी कर जवाब मांगा है। सूत्रों के मुताबिक कई स्वास्थ्यकर्मी नोटिस मिलते ही गिड़गिड़ाने लगे और भविष्य में गलती न दोहराने की कसमें भी खाईं। मगर एसआइसी लिखित जवाब लेने पर अडिग रहीं।

पहले भी कई लोग मौखिक शिकायत लेकर आते थे, लेकिन लिखकर देने की बात कहने पर पीछे हट जाते थे। इस नाते दोषी कभी पकड़ में नहीं आए। इस प्रकरण में कमेटी गठित कर दी गई है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

- डा. लिली श्रीवास्तव, एसआइसी-महिला अस्पताल।

शिकायत के बाद भी महिला अस्पताल में नहीं थम रही धन उगाही 

महिला एवं बाल विकास समिति की टीम से शिकायत और एसआइसी डा. लिली श्रीवास्तव की ओर से बुधवार को नोटिस जारी किए जाने के बाद भी महिला अस्पताल में प्रसव बाद धन उगाही बदस्तूर जारी है। दिन में हंगामा के बाद विगत मंगलवार रात फिर वसूली की गई। बुधवार को दोपहर 2:30 बजे तक तीन सिजेरियन डिलेवरी हुई। सूत्रों के मुताबिक हर एक से लेबर रूम में ही दो से तीन हजार मिठाई के नाम पर लिया गया। वहीं लेबर रूम से वार्ड में शिफ्ट कराने वाले स्वास्थ्यकर्मियों सहित वार्ड की स्टाफ नर्स तक ने पैसे वसूले। एक नंबर वार्ड में भर्ती जैतपुरा क्षेत्र व चोलापुर ब्लाक की प्रसूताओं के परिवारीजनों ने बताया कि यहां कदम-कदम पर पैसे देने पड़ते हैं। शिकायत की हिम्मत इसलिए नहीं होती कि हमारे मरीज को दिक्कत हो जाएगी। जो भी पैसा लगे, लेकिन हमारा मरीज सुरक्षित रहे, यही सोचकर हम खामोश रह जाते हैं।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty