यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 18, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
फ्रांस के नितिन ने बनारस की सड़कों पर जरूरतमंदों को ओढ़ाया कंबल, बोले - 'आप भी कर सकते हैं'
नितिन श्रीवास्तव जब अपने घर वाराणसी लौटे तो उनको अपने शहर के जरूरतमंदों का ख्याल आया। भीषण सर्दी में ठंड ...और पढ़ें

वाराणसी, जेएनएन। फ्रांस में एचसीएल जैसी कंपनी में काम करते हुए कोरोना संक्रमण काल में भारतीय लोगों की मदद करने के लिए इतने चर्चित हुए थे कि फ्रांस में भारतीय दूतावास ने भी उनको सम्मानित किया था। कोरोना संक्रमण काल के संघर्षों से निबटकर नितिन श्रीवास्तव जब अपने घर वाराणसी लौटे तो उनको अपने शहर के जरूरतमंदों का ख्याल आया। भीषण सर्दी में ठंड से ठिठुरते लोगों को देखा तो फ्रांस में मिले अनुभवों को यहां भी अनुपालन करने का ठानकर रात में सड़क पर सो रहे लोगों को कंबल ओढ़ाने चल पड़े।

प्रवासी भारतीय के तौर पर नितिन श्रीवास्तव दो वर्ष पूर्व वाराणसी में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान आयोजन में सम्मिलित भी हो चुके हैं। देश की शान को विदेशों में कायम रखने के संदेश को उन्होंने कोरोना काल में इतना फैलाया कि फ्रांस में लोगों की मदद करने के लिए भारतीय दूतावास ने उनको सम्मानित भी किया। जागरण से नितिन ने बताया कि कोरोना संक्रमण से फ्रांस सर्वाधिक प्रभावित देश था। वहां पर लोगों तक जरूरत की सामग्री पहुंचाने की चुनौती को टीम बनाकर संभाला और हजारों जरूरतमंदों तक सामग्री पहुंचाई थी। अब फ्रांस कोरोना से लगभग उबरने के कगार पर है तो वापस अपने घर बनारस आने पर रात में भीषण सर्दी में सड़क पर सोते लोगों को देखकर मदद करने का निर्णय लिया।

बताया कि रात में सड़क पर सोते लोगों को कंबल ओढ़ाने और वृद्धावस्था आश्रम में कंबल दान देकर संतुष्टि मिली है। उन्होंने जागरण के जरिए लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण के बाद भी मदद करने की अपील की है। खुद उन्होंने घाट और आसपास लोगों को खुले आसमान के नीचे सोते देखा तो अपनी गाड़ी में 101 कंबल लेकर आधी रात के बाद निकल पड़े और जरूरतमंदोंं को गुपचुप कंबल ओढ़ाकर चल दिए। नितिन बताते हैं कि यूरोप में कोरोना संक्रमण अभी भी बना हुआ है ऐसे में दोबारा फ्रांस लौटकर नौकरी के साथ ही लोगों की हर संभव मदद करना है मगर देश और खासकर अपनी जन्मभूमि बनारस से लगाव बना रहे उसके लिए नई रणनीति लेकर वह जल्द ही वापस आएंगे। फ्रांस में लोगों की मदद के लिए तो उनके सहयोगी फ्रांंसीसी मित्र हुआ करते थे लेकिन घर आने पर इस नेक काम में उनकी मदद करने के लिए स्वजन रमेश श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव, रंजना श्रीवास्तव, शिप्रा श्रीवास्तव, वंशिका, नाइशा, समीक्षा और मित्र शिवम पांडे का भी साथ मिला तो गंगा घाट से लेकर शहर के कई हिस्सों में वह रात तक कंबल लोगों को ओढ़ाकर सर्दियों का सहारा बांटते रहे।
