नक्सली विचारधारा वाले शहरी ने दी थी बृजेश गंझू उर्फ गोपाल को पूर्वांचल में पनाह, उस तक पहुंचने में जुटी एटीएस
वाराणसी में 25 लाख के इनामी नक्सली बृजेश गंझू के एटीएस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद शहरी नक्सली नेटवर्क ...और पढ़ें

शहरी नक्सलियों ने दी थी बृजेश गंजू को पनाह, एटीएस कर रही गहन जांच।
HighLights
बृजेश गंजू मुठभेड़ के बाद शहरी नक्सली नेटवर्क उजागर।
एटीएस गंजू को पनाह देने वालों की तलाश में।
पूर्वांचल में नक्सलियों का लंबा इतिहास और शहरी कनेक्शन।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। झारखंड के चतरा जनपद अंतर्गत लवलंग निवासी 25 लाख रुपये के इनामी बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह की वाराणसी के रामनगर में एटीएस से हुई मुठभेड़ में मारे जाने के बाद एक बार फिर से शहरों में छिपकर नक्सली विचारधारा को खाद पानी दे रहे लोगों की करतूत उजागर हो गई है।
बृजेश गंझू ऐसे ही लोगों के यहां छिपकर रह रहा था, जिसके बारे में एटीएस ने नए सिरे से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। करोड़ों की आबादी में छिपे ऐसे लोगों की पहचान करना और उन्हें बेनकाब करना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।
खुफिया टीमें सन 2004 में चंदौली में पीएसी की गाड़ी को लैंड माइनिंग बम से उड़ाकर कई जवानों को मौत के घाट उतारने वाले चंदाैली जिले के चकरघट्टा निवासी सुभाष बियार को पुलिस 26 साल बाद भी नहीं ढूढ़ पाई है। सुभाष के ऊपर शासन ने इनाम घोषित कर रखा है, जिसे पकड़ने के लिए कई बार सुरक्षा एजेंसियों ने जाल बिछाया लेकिन वह बच निकला।
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शहरी नक्सलियों का बलिया कनेक्शन आया था सामने
2023 में एटीएस से बलिया में छिपे नक्सलियों के सच काे सामने लाया था। बलिया के सहतवार थाना क्षेत्र से नक्सली तारा देवी, लल्लू राम, सत्यप्रकाश, राममूरत और विनोद साहनी को गिरफ्तार किया था। इनके पास से पिस्टल, कारतूस, मोबाइल, लैपटॉप और माओवादी साहित्य बरामद होने की बात सामने आई।
जांच में बलिया निवासी संतोष वर्मा उर्फ मंतोष के जरिए पूर्वांचल में संगठन के विस्तार और नए सदस्यों की भर्ती की बात सामने आई। बाद में इस मामले की जांच एनआइए ने अपने हाथ में ले लिया था। इसी तरह बलिया में ही ग्राम प्रधान की पत्नी की हत्या में फरार नक्सली को सीताराम उर्फ विनय निवासी मुड़ियारी थाना सहतवार बलिया को वर्ष 2025 में एटीएस ने वाराणसी से दबोचा था।
सीताराम प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन सीपीआइ माओवादी का प्रमुख सदस्य निकला, जिसके ऊपर सरकार ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसे काशी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था, जिसकी जांच में पता चला कि वह 13 वर्षों से वेष बदलकर शहरों में छिपे नक्सली विचारधारा के लोगों के यहां पनाह लिए हुए था।
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1990 के दशक में नक्सलियों ने पूर्वांचल के चंदौली, मीरजापुर आदि में पसारे पांव
पूर्वांचल में नक्सली गतिविधियों का इतिहास करीब तीन दशक पुराना है। 1990 के दशक में चंदौली के नौगढ़ और सोनभद्र के इलाकों में माओवादी गतिविधियां सामने आने लगी थीं। वर्ष 2000 में नौगढ़ थाने में प्रतिबंधित माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के खिलाफ पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद चंदौली, मीरजापुर और सोनभद्र नक्सल गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बने।
उस दौर में नौगढ़ के जंगलों में जमीन दिलाने को लेकर नक्सलियों ने आदिवासियों को साधा और पहले पुलिस और बाद आम जनता के लिए मुसीबत बन गए। लगभग 100 से अधिक लोगों, जिनमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे, की नक्सली हिंसा में मौत हुई। 2001 में मीरजापुर के खोराडीह स्थित पीएसी कैंप पर माओवादियों ने हमला कर 14 एसएलआर और एक स्टेनगन समेत हथियार लूट लिए थे।
2004 में चंदौली के नौगढ़ के हिनौत घाट में पीएसी के ट्रक को बारूदी सुरंग से उड़ाने की घटना सामने आई थी। इसके बाद चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र को माओवादी प्रभावित घोषित किया गया था। नौगढ़ और शहाबगंज क्षेत्र दल उन दिनों नक्सलियों के मजबूत इलाकों में गिने जाते थे।
चंदौली, मीरजापुर, सोनभद्र में एडीशनल एसपी नक्सल आपरेशन का पद हुआ सृजित
चंदौली, मीरजापुर, सोनभद्र में लगभाग डेढ़ दशक पूर्व एडीशनल एसपी नक्सल आपरेशन का पद क्रिएट हुआ था, जो अब भी बदस्तूर है। सरकार जंगल में रहने वालों काे मुख्य धारा में लाने के लिए बड़ी धनराशि खर्च की। अज जब नक्सलवाद खत्म हो चुका है, नौगढ़ पुलिस पूर्व में वांटेड रहे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखती है।
