पूर्वांचल नक्सलियों का रहा है बड़ा गढ़, छिपने से लेकर संसाधन तक आसानी से उपलब्ध, बृजेश गंझू को भी शरण यहीं मिली
यूपी एटीएस ने वाराणसी में झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीपीसी के कमांडर बृजेश गंझू को मुठभेड़ में ढेर कर ...और पढ़ें

यूपी एटीएस ने वाराणसी में ढेर किया 30 लाख का इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू।
HighLights
यूपी एटीएस ने वाराणसी में नक्सली कमांडर बृजेश गंझू को ढेर किया।
बृजेश झारखंड के प्रतिबंधित टीपीसी संगठन का इनामी कमांडर था।
वह टेरर फंडिंग मामले में एनआईए की रडार पर सक्रिय था।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। भोर में रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान में टेंगरा मोड़ से रामनगर होते हुए मुगलसराय जाने वाले मार्ग पर यूपी एटीएस ने बड़ी कार्रवाई की गई। झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) का कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता, पुत्र पंचू गंझू, निवासी लूटू थाना लावालौंग, जिला चतरा, झारखंड, अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ से मुगलसराय की तरफ जाते समय ढेर कर दिया गया।
यह पहला मौका नहीं था जब पूर्वांचल में नक्सलियों की मौजूगी की घटना सामने आई है। बल्कि पूर्वांचल ताे लंबे समय से नक्सलियों का बड़ा गढ़ रहा है, जहां छिपने से लेकर संसाधन तक आसानी से उपलब्ध हैं। सोनभद्र और चंदौली में नक्सलियों के हमले पहले आम थे और लेवी वसूलने वाले नक्सलियों ने यूपी के इन दो जिलों में विशेषतौर पर जंगलों में अपना ठिकाना बना रखा था।
बृजेश गंझू झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के लुट्टू सोहावन का मूल निवासी था। वह वहां पर कारोबारियों और ठेकेदारों से डरा धमकाकर वसूली करता था। झारखंड सरकार ने बृजेश पर 25 लाख और एनआईए ने 5 लाख का इनाम घोषित किया था। बृजेश तृतीय प्रस्तुति कमेटी के सुप्रीमो के तौर पर काम कर रहा था। उल्लेखनीय है कि 8 साल पहले उसके घर की पुलिस द्वारा कुर्की भी की गई थी।
एनआईए की रडार पर वह टेरर फंडिंंग के कारण आ गया था। एनआइए टेरर फंडिंग केस की जांच कर रही थी। इस जांच के दौरान बृजेश गंझू का नाम भी सामने आया जिसके पूर्वांचल से तार जुड़े पाए गए। एनआईए ने केस को लेकर दाखिल की गई चार्टशीट में 17 आरोपियों का नाम शामिल किया था, जिसमें बृजेश गंझू का नाम भी था। एनआईए ने साल 2018 में टेटर फंडिंग केस की जांच शुरू की थी और पूर्वांचल में उसकी सक्रियता सामने आते ही वह धर लिया गया।
यूपी एटीएस पूर्वांचल में नक्सलियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही थी।। यूपी एटीएस की नजर में आने के बाद यह रडार पर आया और इसकी करतूतों की फेहरिश्त सामने आने के बाद एटीएस के जाल में फंस गया। कार्रवाई न केवल बृजेश गंझू को पकड़ने के लिए थी, बल्कि यह नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा संदेश भी माना जा रहा है। पूर्वांचल में गढ़ बनाने की कोशिश में नक्सलियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से यह उम्मीद की जा सकती है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
यूपी एटीएस की इस कार्रवाई से न केवल नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे स्थानीय लोगों में भी सुरक्षा का अहसास होगा। नक्सलियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से यह भी संकेत मिलता है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है और नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए सक्रिय है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है अब परिजनों को सूचना के बाद उनके आने का इंतजार किया जा रहा है।
