वाराणसी [मुहम्मद रईस]। बीएचयू स्थित महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र में विकसित की गई पारिस्थितिक सिद्धांतों पर आधारित जीवन कौशल की नई तकनीक लोगों का जीवन सहज और सरल बनाएगी। इससे जहां लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, स्मरण शक्ति, मानसिक एकाग्रता, आत्म-जागरूकता, कार्य-क्षमता व रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी, वहीं मानसिक तनाव कम करने में मदद मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी इस तकनीक को 'इको-स्किल्स' नाम दिया गया है।

भौतिकता ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है, जो पृथ्वी व मानव जाति के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। पर्यावरण वैज्ञानिक व गंगा शोध केंद्र के चेयरमैन प्रो. बीडी त्रिपाठी कहते हैं- आज बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट, जलवायु परिवर्तन आदि ने संपूर्ण जीवन को असुरक्षित कर दिया है। जीवन में खुशहाली कम व तनाव अधिक होता जा रहा। भीड़ में रहकर भी लोग अकेले होते जा रहे हैं। इन चुनौतियों के समाधान को लोग व्याकुल हैं, लेकिन शायद यह नहीं जानते कि इनका समाधान 'प्रकृति की गोद में ही निहित है।

संपूर्ण व्यक्तित्व का होगा विकास

प्रो. त्रिपाठी द्वारा विकसित 'इको-स्किल्स तकनीक पारिस्थितिक सिद्धांतों पर आधारित वह जीवन कौशल है जो मनुष्य को स्वस्थ, तनावमुक्त, मानसिक एकाग्र और खुशहाल बनाने संग संपूर्ण व्यक्तित्व विकास करती है, जिसका प्रभाव कॅरियर पर भी पड़ता है।

400 युवाओं पर छह माह परीक्षण

जीवन कौशल की इको स्किल्स पद्धति विकसित करने के लिए हुए शोध के दौरान ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के 400 युवाओं पर छह माह तक परीक्षण किया गया। नतीजों में पाया गया कि शिक्षकों के अध्यापन में सुधार के साथ परामर्शदाता के मार्गदर्शन- योग्यता में संवद्र्धन एवं विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास हुआ। आत्मनियमन व आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई।

स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव

परीक्षण में सामान्य लोगों के जोड़ों तथा मांसपेशियों के दर्द सहित उच्च रक्तचाप में कमी, परिवार व समाज के प्रति आत्मीयता और समानुभूति में वृद्धि, उग्र स्वभाव एवं चिड़चिड़ाहट में कमी, दैनिक कार्य समीक्षा व कार्यक्षमता में वृद्धि संग प्रकृति-पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता में भी वृद्धि पाई गई।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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