नाना पाटेकर के निधन से काशी में उदासी, जागरण फिल्म फेस्टिवल में जमाया था रंग, घाटों पर उनकी आवाज की गूंज अभी भी जिंदा
नाना पाटेकर के निधन से वाराणसी में उदासी छा गई है, जहां उन्होंने कई बार शूटिंग की और शहर से ...और पढ़ें

नाना पाटेकर के निधन से काशी में शोक, वाराणसी से था गहरा नाता।
HighLights
नाना पाटेकर का गोवा में कार्डियक अरेस्ट से निधन हुआ।
नवंबर 2023 में 'जर्नी' फिल्म की शूटिंग के लिए वाराणसी आए।
जागरण फिल्म फेस्टिवल में युवाओं को फिल्मों पर सलाह दी।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी की गलियों और घाटों में जब भी नाना पाटेकर आए, शहर ने उन्हें अपनेपन से गले लगाया। गुरुवार सुबह गोवा में कार्डियक अरेस्ट से उनके निधन की खबर आते ही वाराणसी के सिनेमा प्रेमियों और उन लोगों के मन में वही यादें ताजा हो गईं, जब यह सख्त अंदाज वाला कलाकार काशी की मिट्टी पर खड़ा होकर बनारस की बातें कर रहा था।
आज जब वे नहीं रहे, काशी के घाटों पर उनकी आवाज की गूंज कहीं न कहीं बची हुई है। वह आवाज जो कहती थी, बाबा का आशीर्वाद और काशी का प्यार… यही काफी है। नवंबर 2023 की बात है। अनिल शर्मा की फिल्म जर्नी (बाद में वनवास) की शूटिंग के लिए नाना पाटेकर काशी पहुंचे थे। अस्सी घाट से शूटिंग शुरू हुई। बाजारों और घाटों पर कैमरे घूम रहे थे।
तब उन्होंने जागरण से बात करते हुए कहा था कि 35 साल बाद के बनारस को देखने के लिए उत्साहित हूं। समय नहीं मिलने के कारण अभी देख नहीं पाया। जैसे ही शूटिंग पूरी होगी, सबसे पहले बनारस देखूंगा। मेरी फिल्म की शुरुआत बनारस से हो रही है। बाबा काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद और दर्शकों का प्यार मिलेगा।
उन्होंने पुराने और नए बनारस का फर्क भी साफ बताया। पहले का बनारस कहीं गुम हो गया है। भीड़ बहुत हो गई है। ट्रैफिक व्यवस्था खराब है। जहां दस मिनट में पहुंचना चाहिए, वहां घंटा भर लग जाता है। मैं बौखला जा रहा हूं। फिर भी शहर के लोगों के प्यार की उन्होंने बार-बार तारीफ की थी। उन्हीं दिनों एक घटना भी हुई। शूटिंग के दौरान सेल्फी लेने आए एक युवक को उन्होंने थप्पड़ मार दिया।
वीडियो वायरल हुआ। नाना ने खुद वीडियो संदेश जारी कर माफी मांगी। कहा कि यह गलती से हुआ। फिल्म के सीन का हिस्सा था। युवक को अपना आदमी समझ लिया। काशी के लोगों ने हमें इतना प्यार दिया है। हम कभी ऐसा नहीं करते। अगर गलतफहमी हुई तो माफ करें। उन्होंने युवक को ढूंढने की भी बात कही, लेकिन वह भाग चुका था।
मंदिर और आस्था पर उनका नजरिया भी साफ था। उन्होंने कहा था कि बार-बार मंदिर जाकर भगवान को परेशान करने की इच्छा नहीं। जब बात करनी हो तो कहीं भी हाथ जोड़ लेता हूं। जो चाहिए था, उन्होंने दे दिया। अब ऊपर जाकर बात करेंगे। दिसंबर 2024 में वनवास के प्रमोशन के लिए वे फिर काशी आए।
जागरण फिल्म फेस्टिवल में युवाओं से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा, “फिल्मों में सिर्फ पैसे या शोहरत के लिए नहीं आना चाहिए। समाज को कुछ देने की चाहत हो तभी आएं। कैमरे में ताकत है, वह अच्छा-बुरा दोनों संदेश दे सकता है। नाना पाटेकर का काशी से लगाव कोई आजीवन साधना नहीं थी। यह शूटिंग के दौरान बने रिश्ते, शहर के बदलते स्वरूप पर उनकी ईमानदार टिप्पणियों और यहां के लोगों के स्नेह से जुड़ा था। वे बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद मांगते थे, घाटों पर घूमते थे और बनारस की भीड़-भाड़ को अपने अंदाज में महसूस करते थे।
