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मुत्तुस्वामी दीक्षितर की रचनाएं भारतीय मंदिरों और संस्कृति का अनूठा दस्तावेज : निर्मला सीतारमण

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 03 Nov 2026 05:10 PM (IST)

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मुत्तुस्वामी दीक्षितर की रचनाएं केवल भक्ति संगीत नहीं, बल्कि भारतीय मंदिरों, भूगोल ...और पढ़ें

मुत्तुस्वामी दीक्षितर की रचनाएं भारतीय मंदिरों और संस्कृति का अनूठा दस्तावेज: निर्मला सीतारमण।

मुत्तुस्वामी दीक्षितर की रचनाएं भारतीय मंदिरों और संस्कृति का अनूठा दस्तावेज: निर्मला सीतारमण।

HighLights

  1. दीक्षितर की रचनाएं भारतीय मंदिरों का अनूठा दस्तावेज हैं।

  2. सीतारमण ने कृतियों की तुलना 'लोनली प्लैनेट' से की।

  3. रचनाओं में तीर्थस्थलों की भौगोलिक विशेषताओं का वर्णन है।

जागरण संवाददाता, वाराणlसी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान संगीतकार मुत्तुस्वामी दीक्षितर की रचनाओं की विशिष्टता और आध्यात्मिक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके कीर्तन केवल भक्ति संगीत नहीं, बल्कि भारत के मंदिरों, भूगोल, इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं का अनूठा दस्तावेज हैं।

उन्होंने अपने संबोधन में मुत्तुस्वामी दीक्षितर की रचनाओं की तुलना प्रसिद्ध यात्रा-पुस्तक श्रृंखला 'लोनली प्लैनेट' से की। उन्होंने कहा कि आज किसी अनजान स्थान के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए लोग गूगल का सहारा लेते हैं, जबकि पहले यात्री लोनली प्लैनेट जैसी पुस्तकों के माध्यम से किसी स्थान के दर्शनीय स्थलों, खानपान और विशेषताओं की जानकारी प्राप्त करते थे।

सीतारमण ने कहा कि मुत्तुस्वामी दीक्षितर ने इससे भी पहले अपनी संगीत रचनाओं के माध्यम से भारत के विभिन्न तीर्थस्थलों और मंदिरों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया था। उदाहरण के तौर पर काशी में देवी की स्तुति करते हुए वे काशी विश्वलक्ष्मी का वर्णन करते हैं। उनकी रचनाओं में संबंधित मंदिर के पवित्र वृक्ष (स्थलवृक्ष), आसपास की नदियों, पर्वतों और उस स्थान की भौगोलिक विशेषताओं का भी उल्लेख मिलता है।

उन्होंने कहा, दीक्षितर संस्कृत के अत्यंत सुंदर और चयनित शब्दों के माध्यम से देवी-देवताओं की महिमा और दिव्य स्वरूप का वर्णन करते थे। उनकी रचनाओं की एक और विशेषता यह थी कि वे शैव परंपरा, शाक्त उपासना और तांत्रिक साधना के विभिन्न तत्वों को भी अपनी कृतियों में समाहित करते थे।

निर्मला सीतारमण ने यह भी उल्लेख किया कि महान चित्रकारों की तरह मुत्तुस्वामी दीक्षितर अपनी रचनाओं में अपनी विशिष्ट पहचान छोड़ते थे। वे अपनी कृतियों में 'गुरुगुह' नाम की मुद्रा का प्रयोग करते थे और साथ ही राग के नाम को भी रचना में समाहित करते थे।

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