वाराणसी, जेएनएन। रविवार को मदर्स डे के अवसर पर नमामि गंगे ने मां गंगा की आराधना कर कोरोना से मुक्ति और भारत के लिए समृद्धि की कामना की। कोरोना कर्फ्यू की वजह से संयोजक राजेश शुक्ला ने मणिकर्णिका घाट पर एकल रूप से उपस्थित होकर श्री गंगाष्टकम का पाठ किया। मां गंगा की आरती कर दुग्धाभिषेक किया। गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने कहा कि भारत की जीवनधारा मां गंगा हमें कोरोना महामारी से बचा सकती हैं। गंगा की हर बूंद में भारतवासियों के लिए ममता समाहित है । गंगा उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है। यह आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों ही है। गंगा का अविरल प्रवाह सनातनी संस्कृति का अक्षय और अविरल प्रवाह है । सदियों से गंगा भारतवासियों को अपने आंचल तले पाल रही हैं। प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है कि गंगा रूपी धरोहर का संरक्षण करें ।

गाजीपुर में पर्णकुटी पर महंत अरुणदास महाराज ने मां के विभिन्न स्वरूपों का पूजन-अर्चन किया

गाजीपुर के खानपुर क्षेत्र के गौरी स्थित पर्णकुटी पर महंत अरुणदास महाराज ने मातृ दिवस पर मां के विभिन्न स्वरूपों का पूजन-अर्चन किया। गोमती नदी के तट पर जीवनदायिनी अविरल निर्झर निर्मल धाराओं में दुग्ध और पुष्प अक्षत जल अर्पित कर गंगा गोमती नदियों के ममत्व का आभार प्रकट किया गया। नदियों के साथ अपने गर्भ के अन्न जल खनिज आदि रत्नों से सम्पूर्ण जगत की पोषणहार मां बसुंधरा की पूजा अर्चना की गई। श्रीहरि गौशाला मौधा सहित पर्णकुटी के गौशाला में गौ माता को रोली कुमकुम से टीका लगाकर उन्हें गुड़ और घी का भोग लगाकर उनकी पूजा की गई।

खरौना हनुमान मंदिर के पुजारी गंगादास जी ने कहा कि मां के स्नेहिल ममत्व भरे बुनियाद पर बालक की शिक्षा-दीक्षा तथा संपूर्ण जीवन की योग्यता व ज्ञान का महल खड़ा होता है। माता का कर्तव्य केवल लालन पालन व स्नेह दान तक ही सीमित नहीं है। बालक को जीवन में विकसित होने उत्कर्ष की ओर बढ़ने के लिए भी मां ही शक्ति प्रदान करती है। बच्चे के प्रति माता का यह स्नेह परमात्मा का प्रकाश है जो मातृत्व को इस धरती पर देवत्व का रूप हासिल है।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty