वाराणसी, जागरण संवाददाता। अभी पांच दिन पहले ही रविवार को जिस प्रकार तीखी धूप हुई तो लगा कि इस साल सामान्य से कम ही बारिश रहेगी। हालांकि, उसके अगले ही सोमवार से दिन ओडिसा एवं बंगाल की खाड़ी में आइ हलचल से पुरुवा हवा 35-40 प्रति किलोमीटर की रफ्तार से चलने लगी। इसके कारण पूरब से नमी आई और मंगलवार की रात से हल्की बारिश शुरू हो गई। बुधवार को दिनभर तेज हवा के साथ जमकर बारिश हुई। गुरुवार को भी हल्की ही सही दिरभर रूक-रूक बारिश होती रही। इसके कारण मानसूनी सीजन की सामान्य बारिश का आंकड़ा पार हो गया। एक जून से 30 सितंबर तक मानसूनी बारिश मानी जाती है, जिस दौरान औसतन 925 मिमी बारिश मानी जाती है। वहीं 16 सितंबर तक 910 मिमी से अधिक बारिश हो गई थी, जबिक इस सीजन का 14 दिन बाकी है।

तीन दिन बाद गुरुवार को हवा की गति कम हो गई, जबकि बारिश का असर शुक्रवार की सुबह भी जारी रहा। हालांकि, बारिश तीसरे दिन भी जारी रही। बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे से लेकर गुरुवार की रात साढ़े आठ बजे तक 115 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो गई थी। वहीं बीएचयू के किसान सेवा केंद्र के अनुसार 136 मिमी बारिश हुई थी। हालांकि एक दिन में सबसे अधिक बारिश का रिकार्ड अभी भी 15 सितंबर 1976 का है। उस दिन 24 घंटे में 254.4 मिमी बारिश का रिकार्ड है। मौसम विज्ञानी के अनुसार बारिश एवं बादल का मौसम अभी एक-दो दिन बना रहेगा। बाबतपुर स्थित मौसम विभाग के अनुसार काशी में बुधवार की रात साढ़े आठ बजे तक 42.6 मिमी बारिश हुई। ओडिसा के समुद्री तट पर हुई हलचल के कारण काशी सहित पूरा पूर्वांचल बुधवार व गुरुवार को तेज बारिश हुई।

शाम साढ़े पांच बजे तक जहां 24.4 मिमी बारिश हुई थी वहीं रात साढ़े आठ बजे तक यह आंकड़ा 42.6 व सुबह साढ़े आठ बजे तक 96.6 मिलीमीटर हो गया। इससे पहले मंगलवार को लगातार दूसरे दिन 35-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। हालांकि, बुधवार को हवा की गति 30-35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली और गुरुवार को हवा की गति सामान्य हो गई। वैसे बारिश एवं बादल के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिल गई। रात को कूलर ही नहीं पंखे भी बंद करने पड़ जा रहे थे। पंखा चलने पर चादर भी ओढ़नी पड़ रही थी। प्रसिद्ध मौसम विज्ञानी प्रो. एसएन पांडेय ने बताया कि हवा की गति तो कम हो गई है, लेकिन बारिश की संभावना अभी एक-दो दिन और बनी हुई है।

Edited By: Abhishek Sharma