जागरण संवाददाता, वाराणसी : पीएम के संसदीय क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। सड़क, सीवर, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार की स्थिति जितनी बेहतर होनी चाहिए उतनी हो नहीं सकी है। इसके लिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे। नासूर बनती जाम की समस्या पर भी खास ध्यान देना होगा। पर्यटक तो दूर शहर के लोग भी लगभग हर दिन लग रहे जाम के कारण घर से नहीं निकलना चाहते। इन समस्याओं को सभी को मिलकर दूर करना होगा। शनिवार को माय सिटी, माय प्राइड राउंड टेबल में यह बातें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने कहीं।

नदेसर स्थित दैनिक जागरण कार्यालय में हुई राउंड टेबल कांफ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि हर कोई शहर में कारोबार को विस्तार देना चाह रहा है, मगर मूलभूत सुविधाएं तो पहले मिलें। शहर के एकमात्र इंडस्ट्रियल एरिया चांदपुर की सड़क तक चलने लायक नहीं है। सीमित जगह पर कब तक व्यापार होगा। 50 साल में वहां की स्थिति नहीं बदली। इस दौरान कैंपेन की सिटी लिवेबिलिटी सर्वे रिपोर्ट 2018 पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

सुरक्षा की समुचित व्यवस्था के अभाव संग पर्यटन के क्षेत्र में कोई उचित व्यवस्था नहीं है। बनारस में स्वास्थ्य व शिक्षा के लिए पर्याप्त साधन संसाधन है, मगर उनकी बराबर मॉनीटरिंग नहीं होती। बीएचयू को छोड़ दें तो न कहीं अच्छी शिक्षा की उम्मीद की जा सकती है और न ही बेहतर इलाज। यदि कोई उद्योग लगाना चाहता है तो उसे अनुमति के नाम पर इतना दौड़ाया जाता है कि थक कर बैठ जाता है। सिंगल विंडो सिस्टम से हर तरह की अनुमति मिलनी चाहिए, इससे लोग बनारस में ठहरेंगे। रोजगार के साथ शहर का विकास भी होगा। इस दिशा में कोई सरकार ठोस कदम नहीं उठा सकी है। वक्ताओं ने कहा कि शहर को सिमटने से बचाना होगा। दूरदराज के क्षेत्रों को भी विकसित करने की जरूरत है। ऐसा नहीं कि बनारस के लोग शहर से बाहर नहीं निकलना चाहते। पहले उन्हें बेहतर माहौल संग सुविधाएं तो मिलें, जो कई जगहों पर नहीं मिलता।

 

हर कोई समझे अपनी जिम्मेदारी
वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता की अलख जगाई थी। हम सभी को इस मुहिम से जुड़ कर काम करना चाहिए था, मगर अधिकतर जगह इसका अनुपालन नहीं हो रहा। जब तक हर कोई अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा तब तक स्थिति नहीं बदल सकती।

एक बस स्टाप तक नहीं, जाम से कैसे मिलेगी राहत
शहर रोज जाम से कराह रहा है। हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते जा रहे हैं। रोज बन रहीं योजनाएं धरातल पर उतर नहीं पा रहीं। बनारस यूपी का संभवत: पहला शहर है जहां एक बस स्टाप नहीं है। लोग ऐसे में किस तरह यात्रा कर रहे, कैसे राहगीर चलने को मजबूर हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।

बच्चों को करें प्रशिक्षित, नहीं होंगे बेरोजगार
राउंड टेबल के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हमें स्कूल के समय से ही बच्चों को स्किल्ड बनाना होगा। कारण कि कॉलेज में जाने के बाद नौकरी के लिए उनमें बेचैनी बढ़ जाती है, फिर वे स्किल्ड नहीं हो पाते। जिसके चलते बेरोजगार हो जाते हैं। हर संस्थाओं व अमीर व्यक्तियों को भी इस तरह के पुनीत कार्य को आगे आना होगा। बच्चों को स्किल्ड बनाने को सिलेबस में ही व्यवस्था करनी होगी। हमें बच्चों को खेलने की भी व्यवस्था करनी होगी।

चेन स्नेचिंग की बढ़ रहीं घटनाएं, लगवाएं सीसी कैमरा
वक्ताओं ने कहा कि चेन स्नेचिंग की घटनाएं बनारस में बढ़ी हैं। इन घटनाओं को यदि जल्द नहीं थामा गया तो शहर की छवि पर असर पड़ेगा। पर्यटकों सग ऐसी घटना होने पर देश की छवि खराब होती है। पुलिस इस संबंध में गंभीरता दिखाती ही नहीं। सुझाव दिया गया कि यदि मकान के बाहर सीसी कैमरा लगा होगा तो ऐसी घटनाओं का तत्काल खुलासा हो जाएगा।

प्राइवेट प्रैक्टिस छोड़ जनसेवा पर भी जोर दें चिकित्सक
वक्ताओं ने सुझाव दिया कि चिकित्सकों को कमाई से ज्यादा जोर जनसेवा पर देना चाहिए। पृथ्वी के भगवान माने जाने वाले डॉक्टर यदि प्राइवेट प्रैक्टिस में लग जाएंगे तो गरीबों की सेवा कैसे होगी। सरकारी डॉक्टर कमीशन के फेर में न फंसें।

 

By Gaurav Tiwari