बलिया । बलिया के बैरिया/मझौवा 29 करोड़ रुपये की लागत से पिछले वर्ष बने उदईछपरा-गोपालपुर- दुबेछपरा रिंग बंधा में जिस गति से कटान हो रहा है, उससे ऐसा लगता है कि बुधवार की देर शाम तक रिंग बंधा कट जाएगा और दर्जनों गाव एक बार फिर जलमग्न हो जाएंगे। उधर स्थानीय लोग व बाढ़ विभाग के मजदूर कटान को रोकने के लिए कटान स्थल पर लोहे के जाली में भरकर ईंट डालने के साथ-साथ पेड़ काटकर कटान स्थल पर डाल रहे हैं। इसके साथ ही प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर भी कटान स्थल पर डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशासन जुटा बचाव कार्य में

बुधवार की देर शाम तक रिंग बंधे को बचाने के लिए प्रशासन के साथ स्थानीय ग्रामीण भी लगे रहे। कटान को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में भीड़ रिंग बंधे पर जुट गई है, जिन्हें कटान स्थल से दूर रखने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ लोग कटानरोधी कार्य में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मौके पर मौजूद बाढ़ विभाग के एसडीओ सीएम शाही को भलाबुरा सुना रहे थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि एसडीओ को बार-बार चेताया गया था कि क्षेत्रीय ठेकेदारों को कटानरोधी कार्य न कराने दिया जाए लेकिन बाढ़ विभाग के अधिकारियों ने अपने स्वार्थवश क्षेत्रीय ठेकेदारों से कटान स्थल पर कार्य कराया, जिसमें मानक का घोर उल्लंघन कराया गया। इसी का परिणाम है कि आज उक्त रिंग बंधा कटने की स्थिति में है। आधा दर्जन गावों के लोगों में दहशत व्याप्त है।

बंधा कटा तो होगी दुश्‍वारी

अगर यह रिंग बंधा कट जाता है तो गोपालपुर, दुबेछपरा, उदईछपरा, प्रसादछपरा, बुधन चक, पाडेयपुर, गुदरी सिंह के टोला, चिंतामिण राय के टोला, मिश्र गिरि के मठिया, मिश्र के हाता सहित एक दर्जन गाव जलमग्न हो जाएंगे। हजारों एकड़ क्षेत्रफल में खड़ी खरीफ की फसल बर्बाद हो जाएगी। जब जागरण के रिपोर्टर ने मौके पर मौजूद एसडीओ से पूछा कि पहले से कटानरोधी कार्य के लिए क्या तैयारी की गई थी तो उन्होंने कहा कि उम्मीद ही नहीं थी कि यहा कटान होगा। इसलिए कोई तैयारी नहीं की गई थी। मौके पर तहसीलदार बैरिया गुलाब चंद्रा, सीओ उमेश कुमार यादव, एसएचओ गगनराज सिंह सहित पूरे सर्किल की फोर्स मौजूद थी।

एनडीआरएफ टीम तैनात

एनडीआरएफ की टीम को मौके पर तैनात किया गया है, जो बंधा टूटने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएंगे। इस बीच बैरिया-बलिया बंधे पर उदईछपरा-गोपालपुर- दुबेछपरा के लोग घास व जंगल साफ करके अपना आशियाना सुरक्षित करने के लिए तिरपाल आदि टागने लगे हैं। उधर लोगों का कहना है कि ठेकेदारों को रिंग बंधे के निर्माण के लिए बाहर से कैरेज से मिट्टी लाकर रिंग बंधा बनाना था लेकिन कटकेना के ठेकेदारों ने दबंगई दिखाते हुए वहीं बंधे के किनारे से बलुई मिट्टी काटकर रिंग बंधा बना दिया था। इसके कारण आज रिंग बंधा कटने की नौबत आ गई है। ग्रामीणों ने रिंग बंधे के निर्माण व कटानरोधी कायरें की जाच कराने की माग जिलाधिकारी से की।