मऊ, जेएनएन। जिले में धड़ाधड़ खोले गए निजी डिग्री कालेजों के दिन उतने ही तेजी से लदने भी लगे हैं। हाल के दिनों में कई डिग्री कालेजों के प्रबंधन की ओर से कालेज को सदा-सदा के लिए बंद करने का आवेदन कर दिया गया है। वहीं, निजी डिग्री कालेजों की दुर्दशा का आलम यह है कि दो दर्जन से अधिक डिग्री कालेजों में 50 छात्रों से भी कम ने नामांकन कराया है। ऐसे डिग्री कालेजों के शिक्षकों का वेतन व्यय वहन कर पाना प्रबंधकों के बूते से बाहर होता जा रहा है। 

जिले में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाले छात्रों की संख्या प्रतिवर्ष 40 से 45 हजार के बीच रह रही है। इसमें से लगभग आधे छात्र तैयारी या अन्य विश्वविद्यालयों में अध्ययन के लिए महानगरों की ओर निकल जाते हैं, जबकि आधे निजी व सरकारी डिग्री कालेजों तथा तकनीकि शिक्षा के संस्थानों में चले जाते हैं। अब जिले के औसत दर्जे के छात्रों के बीच नर्सिंग, डीफार्मा-बीफार्मा तथा आइटीआइ की पढ़ाई का क्रेज है। उधर, जनपद में 170 से अधिक निजी, अनुदानित व राजकीय डिग्री कालेज हो चुके हैं। 50 से 60 डिग्री कालेजों को छोड़ दें तो अधिकांश कालेजों में बीए व बीएससी की सीटें फुल नहीं हो पा रही हैं।

जिले में बीए व बीएससी की कुल सीटों के आंकड़ों पर गौर करें औसतन एक कालेज में 400 सीटों के हिसाब से लगभग 68 हजार सीटें प्रथम वर्ष में हैं। वास्तविकता यह है कि कई दर्जन डिग्री कालेजों में दहाई के आंकड़ें में स्नातक प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्र पढ़ रहे हैं। कोरोना नें रही-सही उम्मीदों को भी धराशाई कर दिया है। बढ़ते खर्चे व घटती छात्र संख्या से त्रस्त आकर एएन गल्र्स डिग्री कालेज फतहपुर ताल नर्जा, माता दूजा देवी निकुंभ महिला महाविद्यालय कुशमौर, रामबची ङ्क्षसह महाविद्यालय कोलौरा, कर्मालाल बिहारी डिग्री कालेज गोठा सहित कई ने सदा के लिए कालेज बंद करने की रणनीति तैयार कर ली है।  

आंकड़ों में कालेज

170  निजी महाविद्यालय जिले में 

04   अनुदानित महाविद्यालय जिले में 

02   राजकीय महाविद्यालय जिले में 

बोले अधिकारी

कई निजी महाविद्यालयों के प्रबंधक कालेज बंद करना चाहते हैं, जबकि कई बीए-बीएससी की बजाए अन्य ट्रेड के साथ कालेज चलाना चाहते हैं। सच यही है कि निजी प्रबंधकों की आर्थिक कठिनाई बढ़ती जा रही है। तकनीकि शिक्षा की ओर छात्र-छात्राओं का रुझान अब ज्यादा है। - डा.एके मिश्र, नोडल प्राचार्य, डीसीएसके पीजी कालेज, मऊ। 

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