वाराणसी [अभिषेक शर्मा] । भारत और अमेरिका विश्व के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों ही लोकतांत्रिक देशों में समानता आजादी के संघर्षों का भी रहा है। ऐसे में महात्मा गांधी को भी अमेरिका में उतना की महत्व दिया जाता रहा है जितना कि हिंदुस्तान में। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच आज वह दौर है जब भारतीय वहां शीर्ष पदों पर न सिर्फ कार्यरत हैं बल्कि भारत और भारतीयों के लिए नए अवसर भी उपलब्ध करा रहे हैं। बीती दीपावली पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में विशेष आयोजन कर भारतीय समुदायों को आमंत्रित कर यहां की वैश्विक छवि को सराहा। 

शीर्ष पदों पर भारतीय : येल विवि में शीर्ष पद पर भारतीय अमेरिकी शिक्षाविद अंजनी जैन जाना माना नाम हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार की प्रमुख एविएशन कमेटी में भारतीय मूल के विवेक लाल जो लॉकहीड मार्टिन कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे बोइंग और जनरल एटॉमिक्स कंपनी में शीर्ष पद पर भी रहे हैं। वहीं नासा सहित शीर्ष संस्थाओं में कई चेहरे हैं जो वैश्विक स्तर पर अपनी विशेष पहचान रखते हैं। 

राजनीति में शीर्ष पर भारतीय

सीमा नंदा : राजनीतिक क्षेत्र में भारतवंशी सीमा नंदा डेमोक्रेटिक पार्टी की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीइओ) हैं। वह इस पद पर पहुंचीं पहली भारतीय भी हैं।

कमला हैरिस : कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल कमला हैरिस अब यहीं से सीनेटर भी हैं। वे इस सदन में पहुंचने वाली पहली भारतवंशी भी हैं।

प्रमिला : चेन्नई में जन्मीं प्रमिला वाशिंगटन से प्रतिनिधि सभा के लिए चुनीं जाने वाली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं।

कृष्णमूर्ति : दिल्ली में पैदा हुए कृष्णमूर्ति इलिनॉयस से प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं। शपथग्रहण समारोह में इन्होंने गीता की शपथ ली थी। ऐसा करने वाले वे दूसरे भारतीय अमेरिकी हैं। 

तुलसी गबार्ड : 2013 से अमेरिका के हवाई राज्य से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक सांसद हैं। वे अमेरिकी संसद पहुंचने वाली पहली हिंदू भी हैं जिन्होंने गीता की शपथ ली थी। 

एमी बेरा : पेशे से डॉक्टर बेरा तीसरी बार प्रतिनिधि सभा के सदस्य चुन गए हैं। वह मूलरूप से गुजरात के रहने वाले हैं। मेडिकल ऑफिसर के रूप में सेवा दे चुके हैं।

रोहित खन्ना : प्रतिनिधि सभा के सदस्य रो सिलिकॉन वैली से सांसद हैं। खन्ना पंजाब के रहने वाले हैं और इन्होंने आठ बार अमेरिकी सांसद रहे माइक होंडा को हराया है। 

दूतावास के आयोजन : अमेरिका में भारतीय दूतावास की ओर से वहां बसे भारतीय समुदायों से निरंतर संपर्क बना रहता है। दूतावास की ओर से भी हिंदी संस्कृत सीखने की कार्यशाला हो। प्रवासी भारतीय दिवस को लेकर परेड का आयोजन करना हो या सांस्कृतिक आयोजन हो, सब कुछ भारत से जोड़ते आयोजनों में दूतावास महती भूमिका निभाता आया है। प्रवासी भारतीयों के लिए तैयारियां शुरू होते ही कई सहूलियत वहां पहले से ही आयोजन के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। 'लेटर टू माई मदरलैंड' जैसे आयोजनों ने दूतावास को भारत और अमेरिकी संबंधों में मजबूत सेतु के तौर पर उभारा है।

Posted By: Abhishek Sharma

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