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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नवजात की नाभि को रखें सूखा, 72 घंटे तक न कराएं स्नान

By JagranEdited By:
Published: Thu, 19 Nov 2020 08:20 PM (IST)

जागरण संवाददाता वाराणसी नवजात की उचित देखभाल के लिए जरूरी है कि चिकित्सालय में ही प्रसव

नवजात की नाभि को रखें सूखा, 72 घंटे तक न कराएं स्नान
नवजात की नाभि को रखें सूखा, 72 घंटे तक न कराएं स्नान

जागरण संवाददाता, वाराणसी : नवजात की उचित देखभाल के लिए जरूरी है कि चिकित्सालय में ही प्रसव कराया जाय। प्रसव के 48 घंटे तक मां एवं शिशु एहतियात के लिए चिकित्सालय में ही रुकें। नवजात को तुरंत न नहलाएं, बल्कि केवल शरीर पोंछकर मौसम के अनुसार साफ, सूती और गर्म कपड़े पहनाएं। जन्म के बाद 72 घंटे तक स्नान न कराएं। नवजात शिशु देखभाल सप्ताह अभियान के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डा. एके मौर्या के मुताबिक यदि शिशु को सांस लेने में परेशानी हो या बच्चा रोये नहीं तो उसे तत्काल एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में भर्ती कराना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जन्म के एक घंटे के अंदर मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना शुरू कर दें और छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराएं। जन्म के तुरंत बाद बच्चे का वजन लिया जाए एवं विटामिन-के का इंजेक्शन लगाया जाए। नियमित और संपूर्ण टीकाकरण जरूर कराएं, जिससे बच्चा सुरक्षित व स्वस्थ रहे। नवजात की नाभि सूखी एवं साफ रखें। कम वजन वाले और समय से पहले जन्मे बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाए और शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) की विधि को प्राथमिकता दी जाए। परिवार का कोई भी सदस्य केएमसी करा सकता है बशर्ते वह बीमार न हो। शिशु को बार-बार स्तनपान कराते रहें।

सीएमओ डा. वीबी सिंह ने बताया कि जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान और छह माह तक सिर्फ मां का दूध दिए जाने से शिशु मृत्यु दर में 20 से 22 फीसद तक की कमी लाई जा सकती है। नवजात शिशु की उचित देखभाल से उसके बचपन को सुरक्षित बनाया जा सकता है। नवजात शिशु देखभाल सप्ताह का उद्देश्य शिशु की आवश्यक देखभाल के बारे में जनसमुदाय को जागरूक कर शिशु-मृत्यु दर में कमी लाना है। जन्म के तुरंत बाद स्तनपान, छह माह तक केवल स्तनपान और छह माह के बाद ऊपरी आहार देकर बच्चों को सुपोषित बनाने और शिशुओं के समय से नियमित टीकाकरण आदि के बारे में विधिवत जानकारी को अधिकतम फैलाना आवश्यक है। जनपद में जिला महिला चिकित्सालय, लाल बहादुर चिकित्सालय-रामनगर सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के वार्ड में नवजात शिशु की देखभाल संबंधी प्रचार-प्रसार सामग्री लगाई्र जाएगी और गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।