वाराणसी, जेएनएन। काशी के खिलाडि़यों को जल्द ही एक और खेल मैदान मिलने वाला है।  संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर स्थित खेल मैदान में दर्शक दीर्घा का निर्माण जल्द पूरा कराने का निर्णय लिया है। दर्शक दीर्घा गत 25 वर्षों से लंबित है। साथ ही विवि परंपरागत खेल जैसे तीरंदाजी, कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए रूपरेखा बनाने में जुटा हुआ है।

कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने बताया कि नए सत्र से ही आधा दर्जन नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है।  डिप्लोमा स्तर पर ज्योतिष, कर्मकांड, योग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की रूपरेखा भी बना ली गई है। दाखिले के लिए आवेदन जुलाई से वितरित किया जाएगा। वहीं पठन-पाठन अगस्त से शुरू होने की संभावना है।

कुलपति पद में प्रो. शुक्ल का कार्यकाल 24 मई को एक वर्ष पूरा हो रहा है। एक वर्ष पूर्व होने के उपलब्ध में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा परंपरागत विद्या को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास जारी है। शैक्षणिक अदान-प्रदान के लिए नेपाल से पिछले माह एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। मारीशस व चीन से भी समझौता के बातचीत अंतिम दौर पर चल रहीं हैं। वहीं दुर्लभ पांडुलिपियों का प्रकाशन भी लगातार जारी है। कुछ और दुर्लभ पांडुलिपियों पर काम हो रहा है। इसके परिणाम जल्द दिखाई देंगे।

महिला छात्रावास का विस्तार

नए सत्र से महिला छात्रावास का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है। तीन और कमरों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है ताकि जुलाई से आवंटन किया जा सके।

अध्यापकों की नियुक्तियां जल्द

विश्वविद्यालय में अध्यापकों के 77 पद रिक्त चल रहे हैं। रिक्त पदों के लिए आवेदन भी मंगा लिए गए हैं। आचार संहिता खत्म होते ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

अब प्रयोगात्मक पर बल

शास्त्री-आचार्य के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अब प्रयोगात्मक पर बल दिया जाएगा। ज्योतिष, वेद सहित अन्य परंपरागत विद्याओं में प्रयोगात्मक की रूप रेखा बनाई जा रही है। यज्ञ, आहूति की विभिन्न विद्याओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया जाएगा।   

पुरनियों को जोडऩे के लिए समिति गठित

विश्वविद्यालय पुराने छात्रों को संस्था से जोडऩे बौद्ध दर्शन विभाग के प्रो. रमेश कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें प्रो. राम किशोर त्रिपाठी, प्रो. सुधाकर मिश्र, डा. रविशंकर पांडेय सदस्य बनाए गए हैं।

नियमित हुआ शैक्षणिक सत्र

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र नियमित कर लिया गया है। अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ सख्त कदम भी उठाए गए हैं। शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिमाह 'ज्ञान चर्चाÓ का आयोजन किया जा रहा है।

केंद्रीय दर्जा के लिए पहल

प्राच्य विद्या के केंद्र के रूप से विवि की स्थापना 1791 में संस्कृत कालेज के रूप में हुई थी। विवि को दुनिया का सबसे प्राचीन संस्था होने का गौरव प्राप्त है। इसके बावजूद संस्था आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इसे देखते हुए केंद्रीय दर्जा के लिए एक बार फिर नए सिरे से प्रयास किया जाएगा।  

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Posted By: Vandana Singh

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