वाराणसी, जेएनएन। फिल्म संस्कृति के निर्माण में सतत प्रयासरत जागरण फिल्म फेस्टिवल के दसवें संस्करण का शुक्रवार को जेएचवी मॉल में शुभारंभ किया गया। अपने अनूठेपन के कारण देश-दुनिया में प्रशंसा बटोर रहे फेस्टिवल में पहले दिन एक-एक कर छोटी-बड़ी तीन फिल्में आंखों से होते मन को झकझोरते दिलों में उतरती चली गईं। 

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि होमगार्ड, सैनिक कल्याण एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अनिल राजभर ने कहा कि दैनिक जागरण फिल्म फेस्टिवल के जरिए सामाजिक सरोकार की नई इबारत लिख रहा है। फिल्में कैसे सुधार का जरिया बन सकती है, जागरण ने यह दृष्टिकोण पैदा किया। यह सोचने-समझने पर विवश किया कि हमारी समाज के प्रति कुछ जिम्मेदारी है। हम जहां कहीं भी स्थापित हैं, वहीं से ही प्रयास कर योगदान कर सकते हैं। 

फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा ने जेएफएफ के दो अंकों (दसवें संस्करण) में पहुंच जाने की बधाई दी। कहा कि जागरण फिल्म फेस्टिवल से सिनेमा की अच्छी पौध निकल रही। वास्तव में आज का सिनेमा पेड़ों के पीछे नृत्य-गीत और मंडप तक सीमित नहीं रहा, यह अपने बीच की कहानी मांगता है। सिनेमा वह है जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, सवाल भी खड़े करे। जागरण फिल्म फेस्टिवल से सार्थक सिनेमा को सपोर्ट मिल रहा है। साथ ही पर्दे पर न आ पाने वाला सिनेमा भी सामने आ रहा है।  

स्वागत करते हुए दैनिक जागरण के निदेशक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि फेस्टिवल अछूती फिल्मों को लेकर लोगों के सामने आता है। दर्शकों को फिल्मों के सही मायने बताता है। उन्होंने बेहतरी के लिए सुझाव व मार्गदर्शन का आग्रह किया। रजनीगंधा के एरिया मैनेजर शैलेंद्र दुबे, आर्य महिला पीजी कालेज प्रबंध समिति की असिस्टेंट सीईओ पूजा दीक्षित, बैंक आफ बड़ौदा के डीजीएम प्रतीक अग्निहोत्री ने शुभकामना दी। इससे पहले अतिथियों ने दीप जलाकर फेस्टिवल का शुभारंभ किया।

रजनीगंधा के सहयोग से आयोजित फेस्टिवल का शुभारंभ देवाशीष मखीजा निर्देशित फिल्म भोंसले से किया गया। इसे नगर के गणमान्यजनों के साथ ही हर आयु वर्ग के काशीवासियों ने खूब सराहा। इसके अलावा अनिल राही निर्देशित तुम्बाड और फेस्टिवल फोकस कंट्री पार्टनर अर्जेंटीना की फिल्म आइ टीटा : ए लाइफ आफ टैंगो दिखाई गई। इन संदेशपरक फिल्मों का जादू लोगों पर इस कदर छाया कि लोग शुरु से अंत तक कुर्सियों पर डटे रहे। अगले दो दिनों में छोटी-बड़ी 15 फिल्में एक-एक कर सामने आती जाएंगी। मनोरंजन के साथ सीखने का मौका देने समेत अनूठे कांसेप्ट के कारण बेहद खास फेस्टिवल में दूसरे दिन पांच और तीसरे दिन नौ फिल्मों का गुलदस्ता गजब अहसास देगा। देश में फिल्म संस्कृति निर्माण के मिशन पर चला फेस्टिवल सिने हस्तियों से रूबरू होने का भी मौका देगा। फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा दूसरे दिन इस क्षेत्र में संघर्षरत युवाओं से संवाद भी करेंगे। निर्देशक सत्यांशु सिंह की मास्टर क्लास और इसके ठीक बाद उनकी फिल्म चिंटू का बर्थ डे पर्दे पर होगी। अनिल कपूर के फिल्मी सफर की अहम फिल्म वो सात दिन भी देखने को मिलेगी।

तीसरे दिन अपने दमदार एक्शन के लिए लोकप्रिय फिल्म अभिनेता विद्युत जामवाल अपनी 'फिल्म कमांडो-3 के बारे में बात करेंगे। क्लासिक बॉलीवुड फिल्म कर्मा की स्क्रीनिंग से ख्यात अभिनेता व लेखक कादर खान को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसी दिन ओटीटी रिलीज राघव सुब्बु निर्देशित कोटा फैक्ट्री की स्क्रीनिंग और फिर द ताशकंद फाइल्स के साथ समारोह अगले वर्ष तक के लिए विदा होगा। इस तरह विशाल फलक वाली साहित्य कला की नगरी के युवाओं के लिए यह सुनहरा अवसर होगा।

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Posted By: Saurabh Chakravarty

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