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अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक पहुंचे इसरो निदेशक दिनेश कुमार सिंह, वाराणसी के क्वींस कॉलेज में ताजा कीं पुरानी यादें

Published: Mon, 05 Oct 2026 11:59 PM (IST)

इसरो के यूआरएससी निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने अपने पुराने स्कूल, वाराणसी के क्वींस इंटर कॉलेज का दौरा किया। उन्होंने ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

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HighLights

  1. इसरो निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने अपने पुराने स्कूल का दौरा किया।

  2. छात्रों से अंतरिक्ष विज्ञान और करियर पर खुलकर बात की।

  3. भारत के अंतरिक्ष स्टेशन और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। कभी इस स्कूल के कक्ष में किसी साधारण बेंच पर बैठकर भविष्य के सपने बुनने वाले दिनेश कुमार सिंह सोमवार को अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया के एक चमकते सितारे के रूप में अपने ही स्कूल लौटे। अवसर था पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित संवाद का, जहां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के यूआर राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी) के नवनियुक्त निदेशक दिनेश ने विद्यार्थियों से खुलकर बात साझा की।

वर्ष 1981 से 1984 तक इसी प्रांगण में अपना विद्यार्थी जीवन बिताने वाले दिनेश जब विवेकानंद सभागार के मंच पर पहुंचे, तो उनका दिल भर आया। उनके पिता स्व. अमृत लाल सिंह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में कार्यरत थे। उन्होंने अपने उन गुरुजनों को पूरी श्रद्धा के साथ नमन किया, जिन्होंने उनके जीवन की नींव रखी थी। वह दौर भी याद किया, जब कक्षाओं में जगह पाने के लिए बच्चों में होड़ लगी रहती थी।

उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि इस क्वींस कालेज की अनुशासन भरी पढ़ाई ने ही उन्हें समस्याओं को सही ढंग से सोचने और अपनी स्मरण शक्ति को मजबूत करने की प्रेरणा दी है। कार्यक्रम का रुख जब विज्ञान और भविष्य की तरफ मुड़ा तो माहौल और भी रोमांचक हो गया। इसरो के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने आज की पीढ़ी को बड़ी चेतावनी और नया दृष्टिकोण दिया।

कहा कि जिस प्रकार मानव आज इस छोटी सी धरती पर आधिपत्य जमाने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है, ठीक उसी प्रकार बहुत जल्द चंद्रमा और अन्य ग्रहों पर भी यह होड़ नजर आएगी। अंतरिक्ष में लगातार बढ़ती सैटेलाइट्स की संख्या आने वाले समय में बहुत बड़ी चुनौती बनने जा रही है। भारत अंतरिक्ष में अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में उभरते करियर विकल्पों पर चर्चा की और छात्रों के जिज्ञासा भरे तीखे व प्यारे सवालों के बड़े ही सरल अंदाज में जवाब दिए।

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