कृषि उत्पादन में अमेरिका-चीन को पछाड़ सकता है भारत, प्रमुख सचिव कृषि ने वाराणसी में किया बड़ा दावा
प्रमुख सचिव कृषि एमके शन्मुगा सुन्दरम ने कहा कि भारत कृषि उत्पादन में अगले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ सकता है।

मिट्टी के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की और कृषि में तकनीक व निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया।
HighLights
भारत कृषि उत्पादन में विश्व में तीसरे स्थान पर है।
मिट्टी में कार्बन की मात्रा घटने पर चिंता व्यक्त की गई।
किसानों को इंटरनेट और निर्यात पर ध्यान देने की सलाह।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रमुख सचिव कृषि एमके शन्मुगा सुन्दरम ने गुरुवार को कहा कि कृषि उत्पादन के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। अगले दो से तीन वर्षों में अमेरिका और आठ से नौ वर्षों में चीन को भी पीछे छोड़ सकता है। वह गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल में वाराणसी, प्रयागराज और विंध्याचल मंडल की संयुक्त रबी उत्पादन गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत के 15 करोड़ किसानों में दो करोड़ महिलाएं हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के ढाई करोड़ किसानों में करीब 20 लाख महिला कृषक हैं। संयुक्त राष्ट्र इस वर्ष को अंतरराष्ट्रीय महिला कृषक वर्ष के रूप में मना रहा है। आजादी के समय देश का कृषि उत्पादन 50 मिलियन (पांच करोड़) टन था, जो अब बढ़कर 376 मिलियन (37.6 करोड़) टन हो गया है।
देश में अपनी जरूरत से 75 मिलियन (7.5 करोड़) टन अधिक अनाज का उत्पादन हो रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश का कृषि उत्पादन 74 मिलियन (7.4 करोड़) टन है। उन्होंने उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि मिट्टी में कार्बन की मात्रा 1.5 प्रतिशत से घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई है। यही स्थिति रही तो अगले 20 से 25 वर्षों में मिट्टी अनुपजाऊ हो सकती है।
वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने कहा कि पहले खेती में तकनीक की चर्चा होती थी, लेकिन अब इंटरनेट पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इंटरनेट के माध्यम से किसान अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने का प्रयास करें। वाराणसी एयरपोर्ट स्थित पैक हाउस में भंडारण की पूरी व्यवस्था वातानुकूलित है। चंदौली में रैक और पाली हाउस की मांग तथा गाजीपुर में प्याज की खेती के लिए ट्रांसप्लांटर मशीन पर सब्सिडी देने के संबंध में शासन से वार्ता का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि मंडल में रबी की फसल का क्षेत्रफल साढ़े छह लाख हेक्टेयर है।
प्रयागराज के मंडलायुक्त डा. लोकेश एम ने बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा किसानों के खेतों तक नहरों का पानी पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए नए लक्ष्य तय कर काम करने की बात कही। साथ ही फतेहपुर में केले की खेती की संभावनाओं का भी जिक्र किया। विंध्याचल मंडल के मंडलायुक्त राजेश प्रकाश ने क्षेत्र में सिंचाई और नहरों से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया।
एपीडा के सीबी सिंह ने बताया कि प्रदेश से कृषि और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। पहले देश में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के पांच केंद्र थे। अब अकेले उत्तर प्रदेश में ही पांच केंद्र हैं। गोष्ठी के दौरान मीरजापुर के पवन तिवारी को तीन लाख रुपये का ऋण दिया गया। हर्षवर्धन और सतीश उपाध्याय को रूफटाप योजना के तहत लाभ दिया गया, जबकि प्याज की खेती के लिए राजकुमार को किट और बीज वितरित किए गए।
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