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एआइ के दौर में तकनीक को अवसर बनाएं, चुनौतियों से न घबराएं - कुमार मंगलम बिड़ला

By Prakash PandeyEdited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 31 Oct 2026 12:54 PM (IST)

आईआईटी बीएचयू के 15वें दीक्षांत समारोह में कुमार मंगलम बिड़ला मुख्य अतिथि रहे, जिन्होंने 62 मेधावियों को 124 मेडल प्रदान ...और पढ़ें

आईआईटी बीएचयू दीक्षांत समारोह: कुमार मंगलम बिड़ला ने दिए सफलता के मंत्र, चुनौतियों को अवसर बनाने का आह्वान।

आईआईटी बीएचयू दीक्षांत समारोह: कुमार मंगलम बिड़ला ने दिए सफलता के मंत्र, चुनौतियों को अवसर बनाने का आह्वान।

HighLights

  1. कुमार मंगलम बिड़ला ने 124 मेडल प्रदान किए।

  2. छात्रों को सफलता और जोखिम पर प्रेरक कहानियां सुनाईं।

  3. बिड़ला को मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि मिली।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। कुलगीत और वंदे मातरम की गूंज के साथ शनिवार को स्वतंत्रता भवन में आइआइटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन और मुख्य अतिथि कुमार मंगलम बिड़ला ने 62 मेधावियों को कुल 124 मेडल और पुरस्कार प्रदान किए। इनमें 97 गोल्ड मेडल, दो सिल्वर मेडल और 25 नकद पुरस्कार शामिल रहे।

समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 2048 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। कुमार मंगलम बिड़ला को संस्थान की ओर से मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि भी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन डा. कोटा हरिनारायण ने की। बीएचयू के कुलपति और बोर्ड के वाइस चेयरमैन प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, आइआइटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे।

डा. महेंद्र नाथ पांडेय ने अपने छात्र जीवन की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उस समय संस्थान आइटी बीएचयू के नाम से जाना जाता था। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में एक चुनाव के दौरान मिले समर्थन और सर्वाधिक वोट हासिल करने का प्रसंग भी सुनाया। प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बिड़ला परिवार और बीएचयू के पुराने संबंधों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि परिवार की ओर से विश्वविद्यालय को अलग-अलग समय पर कई स्थानों पर आर्थिक सहयोग और दान दिया गया है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह में पहली बार बिड़ला परिवार के किसी सदस्य को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

तीन कहानियों से समझाया सफलता और जोखिम का महत्व
मुख्य अतिथि कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि आज उत्साह और खुशी का दिन है। ऐसे अवसर पर वह विद्यार्थियों के साथ तीन कहानियां साझा करना चाहते हैं, ताकि जीवन में कभी चुनौती या असमंजस की स्थिति आए तो वे इनसे कोई सीख लेकर अपनी राह चुन सकें। पहली कहानी उन्होंने एनवीडिया के सह-संस्थापक जेन्सेन हुआंग की सुनाई।

उन्होंने बताया कि परिवार से दूर रहने के दौरान हुआंग ने पहली बार बर्गर को बॉक्स में देखा तो वह उनके लिए नया और रोमांचक अनुभव था। वह ऐसे छोटे अनुभवों को टेप रिकॉर्ड कर परिवार को भेजते थे। बिड़ला ने कहा कि एक छोटी-सी चीज को लेकर उत्सुक रहने वाला व्यक्ति भी आगे चलकर बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। उन्होंने संदेश दिया- 'अपना टाइम आएगा।'

दूसरी कहानी ब्लैकरॉक के सह-संस्थापक लैरी फिंक की थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1986 में फर्स्ट बोस्टन में काम करते हुए फिंक की टीम को ब्याज दरों के गलत अनुमान के कारण करीब 100 मिलियन डालर का नुकसान हुआ। इसके बाद उन्होंने नई शुरुआत का रास्ता चुना और वर्ष 1988 में ब्लैकरॉक की स्थापना की। इस प्रसंग से बिड़ला ने जोखिम उठाने का संदेश देते हुए कहा- 'रिस्क है तो इश्क है।'

तीसरी कहानी को उन्होंने अपने दिल के सबसे करीब बताया, क्योंकि इसमें उनके पिता आदित्य विक्रम बिड़ला की जिंदगी जुड़ी थी। उन्होंने बताया कि पिता ने 1960 के दशक में कारोबार को विस्तार देने की शुरुआत की और उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। 14 नवंबर 1943 को जन्मे आदित्य विक्रम बिड़ला का एक अक्टूबर 1995 को 51 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। पिता से मिली सीख साझा करते हुए कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि जिंदगी केवल लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए।

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