IIT BHU में खुलेगा देश का पहला 'स्कूल ऑफ फिजिकल AI', बनेंगी रोबोट और सेंसर युक्त मशीनें
आईआईटी बीएचयू देश का पहला 'स्कूल ऑफ फिजिकल एआई एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स' स्थापित कर रहा है, जो रोबोटिक्स और बुद्धिमान मशीनों के विकास पर केंद्रित होगा।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
आईआईटी बीएचयू में देश का पहला फिजिकल एआई स्कूल।
रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियों पर बहुविषयक शोध का केंद्र।
2027 से बीटेक पाठ्यक्रम, 'करके सीखने' पर जोर।
शैलेश अस्थाना, वाराणसी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब साइबर दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक परिस्थितियों में काम करने वाली मशीनों और स्वायत्त प्रणालियों से जुड़ेगी। आईआईटी बीएचयू ने इस दिशा में पहल की है। इसके लिए संस्थान में स्कूल ऑफ फिजिकल एआई एंड ऑटोनोमस सिस्टम्स की स्थापना की जा रही है। यह देश का अपनी तरह का पहला स्कूल होगा।
इसका उद्देश्य रोबोटिक्स, बुद्धिमान मशीनों और ऐसी तकनीकों को विकसित करने के लिए बहुविषयक शोध का वातावरण तैयार करना है, जो अपने आसपास के परिवेश को समझकर उसके अनुरूप काम कर सकें।
उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर अभी तक इस तरह का कार्य केवल चीन, जापान व कोरिया देशों में आरंभ किया गया है। अब आईआईटी बीएचयू के माध्यम से भारत ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
स्कूल परियोजना के समन्वयक संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा के निर्देशन में व सह समन्वयक डीन शोध एवं विकास प्रो. आरके सिंह ने के नेतृत्व पूरी योजना तैयार की जा रही है।
संयोजक एसोसिएट प्रो. डॉ. श्याम कमल ने बताया कि सामान्य एआई जहां मुख्य रूप से आंकड़ों, तस्वीरों, भाषा और डिजिटल सूचनाओं का विश्लेषण करती है, वहीं फिजिकल एआई ऐसी तकनीक है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता को रोबोट, सेंसर और भौतिक उपकरणों के साथ जोड़कर वास्तविक दुनिया में काम करने योग्य मशीनें तैयार की जाएंगी।
फिजिकल एआई का लक्ष्य मशीनों को अपने परिवेश को महसूस करने, परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने और उसके अनुरूप कार्रवाई करने में सक्षम बनाना है।
डॉ. श्याम कमल ने बताया कि यह स्कूल संस्थान के निदेशक प्रो. पात्रा की परिकल्पना है। बीती 15 जुलाई को इसकी स्थापना की अधिसूचना जारी की गई थी। तीन दिन बाद ही 18 जुलाई को स्कूल के अध्यक्ष और समन्वय समिति के गठन की सूचना भी जारी हो गई।
उद्योग से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक संभावनाएं
स्थापित होने वाले स्कूल में व्याख्यान की जगह रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियों और एआई आधारित तकनीकों के विकास पर बल दिया जाएगा। ऐसी तकनीकों का उपयोग भविष्य में अंतरिक्ष शोध, औद्योगिक उत्पादन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, मैटेरियल, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि आदि विभिन्न क्षेत्रों में स्वचालित मशीनों को आगे बढ़ाने में हो सकता है।
पाठ्यक्रम व पाठ्यवस्तु निर्धारित, पुस्तकें हो रहीं तैयार
आईआईटी बीएचयू ने इस स्कूल की स्थापना का निर्णय ही नहीं लिया, बल्कि इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं। स्कूल के लिए पाठ्यक्रम निर्धारण करने के साथ ही पाठ्यवस्तु का चयन करते हुए पुस्तकें भी तैयार हो रही हैं।
प्रो. श्याम कमल ने बताया कि पाठ्यक्रम निर्धारण समिति मे उनके सहित प्रो. रजनीश कुमार, प्रो. ओमजी पांडेय व प्रो. एसके सिंह चार लोग कोर समिति के सदस्य बनाए गए हैं तो विस्तारित समिति में संस्थान के 30 विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
2027 से आरंभ हो जाएंगी कक्षाएं
लर्निंग बाय डूइंग (करके सीखने) और ज्ञात से अज्ञात की ओर पद्धति का यह पहला स्कूल होगा। स्कूल में अगले सत्र यानी 2027 से प्रवेश और पढ़ाई आरंभ हो जाएगी। पाठ्यक्रम चार वर्ष का होगा। यहां से विद्यार्थियों को बीटेक इन फिजिकल एआई आटोनामस सिस्टम में डिग्री मिलेगी। प्रवेश जेईई एडवांस्ड के माध्यम से होगा।
बैच में 30-60 विद्यार्थी रखे जा सकते हैंं। छठें सत्र मे विद्यार्थियों को छह माह के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में प्रयोग के लिए भेजा जा सकता है। परीक्षा प्रणाली ओपेन बुक और मशीन प्रोजेक्ट आधारित होगी।
50 प्रतिशत अंक उत्पाद आधारित होंगे यानी प्रत्येक विद्यार्थी को कोई न कोई मशीन तैयार करना अनिवार्य होगा। इसके लिए एआई का पूरा कोर्स रि-डिजाइन्ड कर भौतिक रूप में बनाया जा रहा है। स्कूल में सभी प्रयोगशालाएं भारतीय विज्ञानियों के नाम पर होंगी।
