गंगा की गोद में वायुसेना का शौर्य: 'विंग्स ओवर गंगा' में लड़ाकू विमानों ने दिखाया अद्भुत पराक्रम
भारतीय वायुसेना ने वाराणसी में 'विंग्स ओवर गंगा' कार्यक्रम में अपनी 94वीं वर्षगांठ मनाई, जहाँ लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों ने गंगा नदी के ऊपर अद्भुत हवाई करतब दिखाए।

HighLights
वायुसेना ने वाराणसी में 'विंग्स ओवर गंगा' कार्यक्रम आयोजित किया।
लड़ाकू विमानों ने गंगा नदी के ऊपर हैरतअंगेज हवाई करतब दिखाए।
राफेल, तेजस जैसे विमानों ने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन किया।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। शिव की नगरी काशी और गले में हार की तरह लिपटी अर्द्धचंद्राकार गंगा की धारा के ऊपर शनिवार को भारतीय वायुसेना ने शौर्य-पराक्रम का प्रदर्शन किया तो अनूठा देवलोक सजाकर उसका भी दर्शन करा दिया। हनुमान चालीसा की चौपाइयों और रुद्र मंत्रों की गूंज के बीच वायु वीरों ने अदम्य साहस और अद्भुत कौशल दिखाते हुए हैरतअंगेज कलाबाजी से हर एक का दिल जीत लिया।
मिसाइल से लैस छह लड़ाकू विमानों ने गर्जना संग प्रचंड प्रदर्शन किया। काकपिट से सीधे वायु योद्धाओं के स्वर काशीवासियों के कानों तक पहुंचे तो हर हर महादेव और भारत माता की जयकार से जनसमूह ने उनका अभिनंदन किया। 2.40 घंटे तक चली हेलीकाप्टरों और लड़ाकू विमानों की एक से बढ़कर एक कलाबाजी ने लोगों को बांधे रखा।
मौका था वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित विंग्स ओवर गंगा के दूसरे दिन का।वायुवीरों ने काशी के आध्यात्मिक स्वरूप को श्रद्धा समर्पित करते हुए अपने फार्मेशन को काशी, हनुमान, केदार, कैलाश, नीलकंठ, महादेव, रुद्र, शंकर, ओंकार, नटराज, त्रिदेव, गंगा, सारनाथ और असि जैसे पावन नाम दिए थे।
अदम्य साहस और अभेद्य पराक्रम का सजीव प्रमाण
आसमान में लड़ाकू विमान की कलाबाजियां करते वायु वीरों ने देवाधिदेव महादेव, मां गंगा को नमन किया। लड़ाकू विमान राफेल ने प्रचंड वेग के साथ आसमान में वर्टिकल चार्ली का दांव लगाया तो ध्वनि की गति से दौड़ते विमान की गड़गड़ाहट ने लोगों में अद्वितीय ऊर्जा का संचार कर किया। सुखोई-30 एमकेआइ का आकाश में घूमना और मिराज-2000 का सटीक नियंत्रण वायुसेना के अदम्य साहस और अभेद्य पराक्रम का सजीव प्रमाण दे रहा था।
स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने उड़ान भरी तो आत्मनिर्भर भारत के सामर्थ्य को देखकर लोगों सीना गर्व से फूल गया। जगुआर और मिग-29 की तीव्र गति ने संदेश दिया कि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित और अजेय हैं। आधुनिक विमानों के साथ वायुसेना के पुराने विमानों ने भी आसमान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर 94 वर्षों की गौरवशाली परंपरा और सेवा को जीवंत कर दिया।
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लाल और सफेद रंग में सजी सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने जब एक साथ उड़ते हुए आसमान के कैनवास पर धुएं से तिरंगी लकीरें खींच कर दंग कर दिया। विमानों के पंखों के बीच की दूरी महज चंद फीट की थी, मगर संतुलन ऐसा कि सूई की नोक का भी फर्क न दिखे। सारंग हेलीकाप्टर की डिस्प्ले टीम के उन्नत हल्के हेलीकाप्टरों ने हवा में अठखेलियां की तो लोग अपलक निहारते रहे।
