वाराणसी, जेएनएन। शिक्षकों को नई तकनीकी से अपडेट करने के लिए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में लर्निंग रिपोर्स सेंटर बनाया गया है। इस सेंटर के माध्यम से वाराणसी ही नहीं पूर्वाचल के शिक्षकों को शिक्षा के नवाचार से अवगत कराया जाएगा। इसके लिए समय-समय पर शार्टटर्म, ट्रेनिंग प्रोग्राम, कार्यशाला, इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे।

खास यह कि विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए कोई पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। उनके आने-जाने, खाने व रहने की भी सुविधा मुफ्त होगी। फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर के लिए पांच करोड़ मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पं. मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर एंड टीचिंग योजना के तहत विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग को फैकल्टी डेवलमेंट सेंटर की स्वीकृति अक्टूबर 2018 में ही दी थी। साथ ही दो स्मार्ट क्लास, सेमिनार कक्ष, निदेशक कक्ष, लर्निग रिर्सोस सेंटर व कंप्यूटर लैब के लिए पांच करोड़ रुपये अनुदान भी दिया था। यह कवायद शिक्षकों को नवीनतम तकनीक से अपडेट करना है। तकनीकी ने शिक्षा के तौर-तरीके को बदल दिया है। वहीं विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षक अब भी परंपरागत तरीके से ही पढ़ा रहे हैं। बीएड के विद्यार्थी भी अध्यापन की अद्यतन तकनीक से दूर है। पिछले वर्ष मिले थे 2.40 करोड़ रुपये : शिक्षकों व विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष करने के उद्देश्य से मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अनुदान की प्रथम किस्त 2.40 करोड़ रुपये वर्ष 2018 में ही जारी कर दी थी। अनुदान के उपयोग के लिए विद्यापीठ का मानव संसाधन मंत्रालय से समझौता भी हुआ था।

इसके तहत निर्धारित अवधि में अनुदान का उपयोग नहीं करने पर विद्यापीठ को ब्याज सहित धन वापस करना होगा। इसे देखते हुए विद्यापीठ ने निर्धारित अवधि में ही सारे संसाधन जुटा लिए। कुलपति आज करेंगे उद्घाटन विभागाध्यक्ष व केंद्र समन्वयक प्रो. अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि इसका उद्घाटन कुलपति प्रो. टीएन सिंह 15 अगस्त को करेंगे। आभासी साफ्टवेयर भी अपलोड केंद्र के उप समन्वयक डा. आलोक कुमार द्विवेदी ने बताया कि लर्निग रिर्सोस सेंटर में वर्चुअल क्लास रूम के कंप्यूटर में आभासी साफ्टवेयर भी अपलोड किया गया है। उन्होंने बताया कि अनुदान की दूसरी किस्त मिलने पर रिकार्डिग रूम व 50 लोगों के लिए हॉस्टल बनवाने की योजना है।