मां अन्नपूर्णा को 150 क्विंटल मिष्ठान-नमकीन का लगेगा भोग, पकवानों की सुवास से महकी काशी
काशी के अन्नपूर्णा मंदिर में दीपावली उत्सव के तहत अन्नकूट महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। धनतेरस पर पट खुलने ...और पढ़ें

काशी में अन्नपूर्णा मंदिर में अन्नकूट महोत्सव की धूम, 150 क्विंटल पकवानों से महकेगी नगरी।
HighLights
अन्नपूर्णा मंदिर में अन्नकूट महोत्सव की तैयारियां जोरों पर।
माता को 150 क्विंटल मिष्ठान-नमकीन का भोग लगेगा।
धनतेरस पर खुलेंगे पट, 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी में उत्सवों का यह चरम काल है, काशी में दीपावली उत्सवों में अन्नपूर्णा मंदिर से प्रसाद और अन्नधन का वितरण का दौर शुरू होने की ओर है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) पर छह नवंबर को स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णेश्वरी के दर्शन के लिए पट खुल जाएंगे। दर्शन-पूजन के साथ ही 10 नवंबर को होने वाले अन्नकूट महोत्सव को लेकर भी तैयारियां तेजी से चल रही है।
मां अन्नपूर्णा की रसोई में कारीगरों का दल 150 क्विंटल मिष्ठान-नमकीन बनाने में जुटे है। देवी को भोग लगाने के लिए बेसन, मैदा, खोवा-चीनी के लड्डू, काजू, बादाम, चिरौंजी, गरी, खोवा समेत सात प्रकार की बर्फी, खुर्मा, बालूशाही, खजूर के गुड़ की जलेबी, गुलाब जामुन समेत नाना प्रकार के मिष्ठान और 35 प्रकार के नमकीन बनाए जा रहे हैं।
अन्नकूट पर माता को 51 क्विंटल खान-पान का भोग लगाया जाएगा। प्रसाद में चावल, कढ़ी, खीर, कई तरह की पूड़ी, पांच प्रकार के पकौड़े होंगे। मिष्ठान-नमकीन समेत अन्नकूट की भोग-झांकी सजाने के लिए पकवान बनाने में 85 कारीगर लगाए गए हैं।
महंत शंकर पुरी महाराज ने बताया कि कूटे हुए अन्न के पकवान (अन्नकूट) बनाने में पूर्वांचल के दक्ष कारीगर लगे हैं। छह नवंबर की भोर चार बजे मां का षोडशोपचार पूजन कर महाआरती की जाएगी और मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे। इसके साथ दर्शन व खजाना वितरण आरंभ होगा। चार दिन भोर में चार बजे से दर्शन चलते रहेंगे। अन्नकूट पर 10 को रात 12 बजे महाआरती कर स्वर्णमयी मां का दर्शन साल भर के लिए बंद हो जाएगा।
पुष्पों से सजी मां अन्नपूर्णा तो बही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रसधार
कार्तिक मास में बाबा विश्वनाथ की नगरी में मंदिरों में शृंगार, पूजन चल रहा है। माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी प्रकाश पर्व का उत्सव प्रारंभ हो गया है। रविवार को मां अन्नपूर्णा का आकर्षक और सुगंधित पुष्पों को दिव्य शृंगार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माता का पूजन कर उन्हें व्यंजनों का भोग लगाया गया। मंदिर प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रसधार भी बही।
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