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काशी में शिव, कृष्ण और राम संग रंगों से उतरी गंगा, कैनवास पर जीवंत हुई उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर

By Saurabh AgrawalEdited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 31 Oct 2026 08:34 PM (IST)

वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ हुआ, जिसमें कलाकारों ने शिव, कृष्ण, राम और गंगा के साथ उत्तर प्रदेश ...और पढ़ें

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HighLights

  1. वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।

  2. कलाकारों ने शिव, कृष्ण, राम, गंगा को कैनवास पर उकेरा।

  3. कलाकृतियां संस्कृति संसद 2026 में कला प्रेमियों के समक्ष प्रदर्शित होंगी।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार छोर पर शनिवार को तूलिका के जरिए शिव, कृष्ण और राम के साथ पतित पावनी गंगा के सुंदर स्वरूप ने आकार लिया। मन में बसी छवि को कलाकारों ने रंगों से कैनवास पर उतार दिया। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर रंगों से जीवंत हो उठी।

मौका था अंतरराष्ट्रीय चित्रकला एवं छायाचित्र कार्यशाला के शुभारंभ का। गंगा महासभा और उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय कला संगम में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों से आए चित्रकार भी शामिल हो रहे हैं।

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कार्यक्रम का उद्घाटन अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा तथा उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सुनील विश्वकर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात कलाकार दुलारी देवी, श्याम शर्मा और अद्वैत गणनायक ने कलाकारों को चित्रकारी की बारीकियां बताई।

उन्होंने अपने हाथों से चित्रकारी करते हुए कलाकारों का अपनी भावनाओं को रंगों से उतारने का तरीका बताया। राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश : धरोहर संरक्षण एवं संवर्धन विषय पर कलाकारों उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक मंदिरों, पवित्र तीर्थों, पौराणिक परंपराओं तथा काशी विश्वनाथ धाम व अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण जैसे अभूतपूर्व पुनरुद्धार कार्यों को अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से कैनवास पर उकेरा। रंग और ब्रश से प्रदेश के धरोहरों की उभरी छवि को दर्शक निहारते रह गए। इस दौरान कई विद्यालयों के छात्र- छात्रा भी मौजूद रहे।

अप्रतिम कलाकृतियां संस्कृति संसद में होंगी प्रदर्शित 
यह आयोजन तीन से पांच नवंबर तक होने वाले 'संस्कृति संसद 2026' में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला की कड़ी के तौर पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला में बनाई गई सभी अप्रतिम कलाकृतियों को संस्कृति संसद के दौरान रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 'सिंजो आबे कला दीर्घा' में कला प्रेमियों के समक्ष प्रदर्शित किया जाएगा।

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