वाराणसी, जेएनएन। काशी में शास्त्रार्थ की परंपरा प्राचीन काल से रही है। लंबे समय बाद गत वर्ष संपूर्णानंद संस्कृत विवि ने नवंबर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शास्त्रार्थ प्रतियोगिता आयोजित की थी। लॉकडाउन को देखते हुए विश्वविद्यालय ने इस बार ऑनलाइन शास्त्रार्थ कराने का निर्णय लिया है। काशी में पहली बार दस मई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन शास्त्रार्थ प्रतियोगिता होने जा रही है। इसके लिए विश्वविद्यालय देश-विदेश के संस्कृत विद्वानों से संपर्क करने में जुटा हुआ है। नेपाल, भूटान, कनाडा, थाईलैंड, मारीशस सहित कई देशों के विद्वानों ने सहमति दे दी है।

संस्कृत विश्वविद्यालय में पहले शास्त्रार्थ प्रतियोगिता होती रहती थीं। हाल के दशकों में विश्वविद्यालय में शास्त्रार्थ परंपरा की कड़ी टूट गई थी। कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल इस परंपरा को आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस क्रम में गत वर्ष विवि में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शास्त्रार्थ प्रतियोगिता का आयोजित किया था। वहीं विश्वविद्यालय अब ऑनलाइन शास्त्रार्थ कराने का प्रयोग करने जा रहा।

कुलपति ने बताया कि देश-विदेश के प्रकांड संस्कृत विद्वानों को ऑनलाइन जोडऩे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। देश-विदेश के करीब 600 विद्वानों को एक प्लेटफार्म पर जोडऩे की रूपरेखा बनी है।

क्या है शास्त्रार्थ

किसी भी गूढ़ विषयों पर दो या दो से अधिक विद्वान चर्चा-परिचर्चा करते हैं उसे शास्त्रार्थ कहा जाता है। शास्त्रार्थ का अर्थ शास्त्रों के ज्ञान से है। शास्त्रार्थ की परंपरा देश में प्राचीन काल से ही रही है। वर्तमान में यह धूमिल होती जा रही है। हालांकि, नागपंचमी सहित विभिन्न अवसरों पर अब भी काशी में शास्त्रार्थ की परंपरा कायम है।

ज्योतिष पर वेबिनार 11 को

इस क्रम में संस्कृत विश्वविद्यालय ने ज्योतिष पर वेबिनार 11 मई को कराने का निर्णय लिया है। विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ल के मुताबिक वैदिक परंपराओं में प्रौद्योगिकी पद्धतियों पर विमर्श होगा।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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