वाराणसी, जेएनएन। रंग बिरंगे खूबसूरत फूल न सिर्फ सुगंध व खूबसूरती बढ़ाते हैं बल्कि ये औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं, इसी तरह मदार व पारिजात का फूल भी है। जो देखने में सुंदर और सुगंधित होने के साथ ही कई रोगों की दवा भी है। वहीं शिवजी को प्रिय धतूरा औषधियों में प्रयोग होता है। मदार, पारिजात, धतूरा से गठिया, पेट की बीमारी, चर्मरोग, खांसी, कफ आदि अनेक बीमारियों में इलाज किया जाता है। क्या हैं इसके औषधीय गुण, किन रोगों में है यह फायदेमंद, इस पर वंदना सिंह की रिपोर्ट....

बेहद गुणकारी

वैद्य अजय कुमार बताते हैं धतूरा अर्क यानी मदार को आयुर्वेद में सेहत के लिए काफी लाभप्रद माना गया है।  इस पौधे की दो प्रजातियां पाई जाती हैं। जिसमें से एक प्रजाति के  फूलों का रंग सफेद और लाल होता है और दूसरी प्रजाति के  फूलों का रंग सिर्फ सफेद ही होता है। ये बेहद ही गुणकारी पौधा है। 

मदार के  औषधीय गुण

-यह त्वचा के रोगों जैसे कुष्ठ, खुजली और फोड़े-फुंसियों को ठीक करता है।

-जिन लोगों को बवासीर की समस्या है वे मदार के  कुछ पत्ते तोड़कर धूप में सुखाकर इसे जलाएं और धुएं को प्रभावित जगह पर लें। इससे बवासीर और दर्द से निजात मिल जाएगी।

-सूजन होने पर आप मदार के पत्तों को सूजन वाली जगह पर सरसों का तेल गर्म करके लगाएं। 

-घुटनों में दर्द होने पर मदार के  पत्तों का लेप लगा लें। 

- कान की बीमारियों में मदार के पत्तों को लेकर उन्हें पानी में उबालकर इनका रस निकला लें। फिर इस रस की दो बूंदे दिन में दो बार कान में डाल लें।

धतूरा का गुण

भगवान शिव को चढ़ाया जाने वाला कांटेदार फल धतूरा आम तौर पर जहरीला और जंगली फल माना जाता है। इसे आयुर्वेद में धूर्त, कनक, उन्मत्त, देवता, महामोही आदि कई नामों से जाना जाता है। 

-धतूरे के रस को सिर पर मलने से बालों से जुएं, डैंड्रफ खत्म होती है और गंजापन में भी लाभ मिलता है। 

-दर्द से राहत पाने के लिए धतूरे के रस को तिल के तेल में पकाकर दर्द वाली जगह पर मालिश से आराम मिलता है। नियमित रूप से धतूरे के रस और तिल के तेल की मालिश करने से जोड़ों की समस्या और गठिया जैसी समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। 

-इसके  पेस्ट को सरसों या तिल के तेल में पकाकर धतूरे का तेल बनाया जाता है, जो एक अच्छा दर्द-निवारक है।

-फेफड़े, छाती आदि में कफ जमा होने पर यह रामबाण की तरह काम करता है।

-इसका प्रयोग रक्त संचार सुचारू बनाए रखने के लिए भी किया जाता है।

-धतूरा हृदय की गतिविधियों को नियंत्रित रखता है।

-अम्लपित्त, श्वांस आदि रोगों में प्रयोग की जाने वाली कई औषधियों में इसका प्रयोग किया जाता है।

पारिजात के गुण

पारिजात या हरसिंगार को देवलोक का फूल कहा जाता है। आयुर्वेद में पारिजात को ज्‍वर व कृमि नाशक, खांसी-कफ को दूर करने वाला, यकृत की कार्यशीलता को बढ़ाने वाला, पेट साफ करने वाला बताया गया है। यह संधिवात, गठिया व चर्मरोगों में लाभदायक है।

-बच्चों के  पेट में कीड़े होने पर इसके  पत्तों के रस में थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर पिलाने से कृमि मल के  साथ बाहर आ जाते हैं या मर जाते हैं।

-हरसिंगार के 6 से 7 पत्ते पीसने के बाद पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक कि इसकी मात्रा आधी न हो जाए। अब इसे ठंडा करके प्रतिदिन सुबह खाली पेट पिएं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से जोड़ों से संबंधित अन्य समस्याएं भी समाप्त हो जाएगी।

-इसके पत्तों को सरसों के तेल में भूनकर दर्द वाली जगह पर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।

Posted By: Abhishek Sharma

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