मीरजापुर, जेएनएन। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी-एक्ट भगवती प्रसाद सक्सेना ने अनुसूचित जाति के युवक की हत्या के आरोपित पिता-पुत्र दयाशंकर पाडेय व पीयूष उर्फ पप्पू पाडेय को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 10-10 हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अभियोजन से मुकदमे की पैरवी अभियोजन अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विवेक सिंह ने कुल दस गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।

दौरान विचारण आरोपित मृत्युंजय उर्फ बच्चा पाडेय के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा बाल न्यायालय में भेज दिया गया। अभियोजन के अनुसार पड़री थानाक्षेत्र के ग्राम अघवार निवासी व मुकदमा वादी अदालत धरकार 15 मई 2003 को समय पाच बजे शाम अपने छोटे भाई फौजदार धरकार के साथ गाव में ही दुर्गा धरकार के दरवाजे पर अपना ट्रैक्टर बनवा रहा था। उसी समय गाव के आरोपित दयाशकर पाडे अपने हाथ में भुजाली व उनके लड़के पीयूष कट्टा लिए आए और कट्टे से फायर कर दिया। फौजदार गिर गया तब दयाशकर ने भुजाली से फौजदार को मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। चोट लगने से अस्पताल जाते समय रास्ते में फौजदार की मौत हो गई। 15 वर्ष बाद न्यायालय में आरोपितों को सजा सुनाई गई।

यह थी हत्या की वजह : अदालत का छोटा भाई फौजदार घटना से पाच वर्ष पूर्व आरोपित दयाशकर पाडेय की पुत्री रक्षा देवी उर्फ गुड़िया से कोर्ट मैरिज करके सूरत में रह रहा था। जिससे आरोपीगण फौजदार धरकार से रंजिश रखते थे। उसके सूरत से लौटकर घर आने पर आरोपितों ने हत्याकाड घटना को अंजाम दिया था। घटना की प्राथमिकी फौजदार के बड़े भाई अदालत धरकार ने थाना पड़री में उसी दिन दर्ज कराया था।

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