वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटने से बढ़ी मुश्किलें, घाटों पर सिल्ट और कीचड़ जमा, छठ और देव दीपावली से पहले सफाई की मांग
गंगा का जलस्तर घटने से वाराणसी के घाटों पर भारी सिल्ट और कीचड़ जमा हो गया है, जिससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों ...और पढ़ें
HighLights
गंगा जलस्तर घटने से घाटों पर सिल्ट जमा।
श्रद्धालुओं, पर्यटकों, नाविकों को भारी परेशानी।
त्योहारों से पहले व्यापक सफाई की मांग।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी में मां गंगा का जलस्तर घटने के साथ ही शहर के प्रसिद्ध घाटों पर समस्याओं का दौर शुरू हो गया है। नदी का पानी नीचे उतरने के बाद घाटों की सीढ़ियों, संपर्क मार्गों और आसपास के परिसरों में भारी मात्रा में सिल्ट, कीचड़ और मलबा जमा हो गया है। इसके कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों, स्थानीय दुकानदारों और नाविकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों और घाटवासियों ने नगर निगम प्रशासन से जल्द से जल्द व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाने की मांग की है।
आगामी त्योहारों को लेकर बढ़ी चिंता
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई बड़े और महत्वपूर्ण पर्व नजदीक आ रहे हैं। स्थानीय निवासी शंभू निषाद ने चिंता जताते हुए बताया कि धनतेरस, देव दीपावली, डाला छठ और कार्तिक पूर्णिमा जैसे महापर्वों पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचते हैं। लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि प्रमुख घाटों की सीढ़ियों पर जगह-जगह दलदल, कीचड़ और पूजा-पाठ का कचरा फैला हुआ है, जिससे लोगों का चलना भी दूभर हो गया है।
वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी राकेश निषाद ने बताया कि कार्तिक मास के पवित्र महीने में बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और दीपदान के लिए आते हैं। जलस्तर काफी नीचे चले जाने के कारण कई स्थानों पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं को पानी तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं की सुविधा का मुद्दा उठाते हुए घाटों पर अस्थायी चेंजिंग रूम (वस्त्र बदलने के कक्ष) की व्यवस्था करने की भी जोर-दार मांग की है। उनका कहना है कि खुले में कपड़े बदलना महिलाओं की निजता और सम्मान से जुड़ा एक गंभीर विषय है, जिस पर प्रशासन को विशेष ध्यान देना चाहिए।
नाविकों और पर्यटकों की बढ़ी परेशानियां
घाटों पर पसरे कीचड़ और सिल्ट के कारण केवल स्नानार्थियों को ही नहीं, बल्कि गंगा में नाव चलाने वाले मल्लाहों और नाविकों को भी भारी असुविधा हो रही है। नदी की धारा दूर चले जाने और घाटों के पास दलदल होने के कारण पर्यटकों को सुरक्षित रूप से नाव तक पहुँचाना एक चुनौती बन गया है। कई स्थानों पर नाविकों को मजबूरी में पटरे और अस्थायी जेटी का सहारा लेना पड़ रहा है, ताकि यात्री बिना फिसले नाव तक पहुंच सकें। मणिकर्णिका, अस्सी, पंचगंगा और दशाश्वमेध समेत कई प्रमुख घाटों पर सिल्ट की परतें जमने से दैनिक धार्मिक अनुष्ठान और नाविकों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
प्रशासनिक स्तर पर सफाई के प्रयास तेज
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम और संबंधित विभागों ने घाटों से सिल्ट हटाने के लिए अपने प्रयास शुरू कर दिए हैं। कई स्थानों पर पंप सेटों के माध्यम से पानी का छिड़काव कर सिल्ट साफ की जा रही है, तो कुछ प्रमुख स्थलों पर जेसीबी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, त्योहारों की नजदीक आ रही तारीखों को देखते हुए स्थानीय लोगों का मानना है कि सफाई की इस रफ्तार को और अधिक तेज करने की आवश्यकता है। शहरवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि पर्वों के शुरू होने से पहले सभी घाटों को पूरी तरह से चकाचक किया जाए, ताकि काशी आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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