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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वाराणसी में अधिशासी अभियंता के गलत डीपीआर पर स्पष्टीकरण तलब, गंगा आधारित पेयजल योजना को नहीं बनाया जा सका जनोपयोगी

By Saurabh ChakravartyEdited By:
Published: Sat, 20 Nov 2021 12:49 PM (IST)

नगरीय पेयजल योजना में हुई धांधली को दुरुस्त करने के लिए बनी डीपीआर को गलत बनाने के लिए जल निगम ...और पढ़ें

भूगर्भ जल दोहन को रोकने के लिए एक दशक पूर्व बनी गंगा आधारित योजना अब तक मूर्तरूप नहीं ले सकी।
भूगर्भ जल दोहन को रोकने के लिए एक दशक पूर्व बनी गंगा आधारित योजना अब तक मूर्तरूप नहीं ले सकी।

जागरण संवाददाता, वाराणसी : नगरीय पेयजल योजना में हुई धांधली को दुरुस्त करने के लिए बनी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को गलत बनाने के लिए जल निगम के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अंकुर श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई है। जल निगम के एमएडी तृतीय अनिल कुमार ने कारण बताओ नोटिस जारी कर अंकुर श्रीवास्तव से स्पष्टीकरण मांगा है।

भूगर्भ जल दोहन को रोकने के लिए एक दशक पूर्व बनी गंगा आधारित योजना अब तक मूर्तरूप नहीं ले सकी है। बसपा के बाद सपा और अब भाजपा की सरकार का भी कार्यकाल बीत गया, लेकिन आरोप और स्पष्टीकरण के आगे पेयजल परियोजना नहीं बढ़ सकी। बसपा व सपा सरकार में हुई धांधली का दुष्परिणाम है कि अब भी शहर में भूगर्भ जल दोहन बरकरार है। बीते पांच साल में भी व्यवस्था नहीं सुधरी। एक बाद एक करीब दो दर्जन से अधिक मिनी नलकूप भी स्थापित हो गए। शहर के रहनवारों के लिए हर घर गंगा जल उपलब्ध कराने की मंशा से जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत दो परियोजनाएं बनाई गईं। वरुणा नदी को आधार बनाकर उस पार की परियोजना का नाम ट्रांस वरुणा तो पुराने शहर के हिस्से को सिस वरुणा नाम दिया गया। ट्रांस वरुणा पेयजल परियोजना की जिम्मेदारी निजी कंपनी मेघा को दी गई जो अब तक ट्रायल कर रही है तो सिस वरुणा पेयजल परियोजना की जिम्मेदारी जल निगम ने खुद उठाई। यह परियोजना धांधली की भेंट चढ़ गई। इसे जनोपयोगी बनाने के लिए फिर से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई। नई कार्रवाई इसी डीपीआर को लेकर हुई है। इसे अपूर्ण बनाने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन अधिशासी अभियंता अंकुर श्रीवास्तव पर कार्रवाई हुई है।

इस मामले में अंकुर श्रीवास्तव का कहना है कि शासन स्तर के अफसरों को जल निगम के स्थानीय अफसरों ने गलत जानकारी दी है। धांधली को दुरुस्त करने के लिए दो प्रोजेक्ट बनाए गए थे जिसे तीन हिस्से में बांटा गया था। पहला दो हिस्सा टंकी तक पानी पहुंचाने के लिए बनाया गया जिसके लिए 108 व सात करोड़ का बजट निर्गत हुआ है। वहीं, 40 करोड़ रुपये घर-घर तक पानी पहुंचाने वाली पाइप लाइन को दुरुस्त करने के लिए बनाया गया था, जिसका जिक्र शासन स्तर के अफसरों से जल निगम के अफसरों ने नहीं किया। इसका दुष्परिणाम हुआ कि यह प्रस्ताव अब भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।