यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
काशी विद्वत परिषद का 17 प्रांतों तक विस्तार
वाराणसी : देश-दुनिया में प्रतिष्ठित श्रीकाशी विद्वत परिषद स्थापना के 101वें साल में अपना दायरा 17 प्रा

वाराणसी : देश-दुनिया में प्रतिष्ठित श्रीकाशी विद्वत परिषद स्थापना के 101वें साल में अपना दायरा 17 प्रांतों तक बढ़ाने जा रहा है। इसमें व्रत-पर्व की तिथियों में भ्रम निवारण के लिए अलग-अलग प्रांत प्रभारी बनाए जाएंगे। हर सूबे में जिलेवार कार्यकारिणी का भी गठन किया जाएगा। इस विशाल टीम के जरिए काशी मुख्यालय की ओर से शास्त्रीय आधार पर शोधित समाधान संदेशों को प्रसारित किया जाएगा। प्रांतवार पदाधिकारियों की 28 नवंबर को तीन बजे से शंकुलधारा कैंप कार्यालय में विद्वत परिषद की आमसभा में घोषणा की जाएगी। इसमें देश भर से धर्म शास्त्र के विद्वान आमंत्रित किए गए हैं।
हाल के वर्षो में ग्रह-नक्षत्रों के उलटफेर से कई मौके ऐसे आए जब व्रत-पर्व की तिथि को लेकर सनातनधर्मियों में भ्रम की स्थिति बनी। पंचांगों में भी विरोधाभास के कारण लोगों को ईधर-उधर भटकना पड़ रहा था। इसे लेकर संबंधित प्रांतों से विद्वत परिषद के पास सेलफोन पर सलाह-सुझाव मांगे जाते रहे हैं। ऐसे में तद्नुसार विस्तार का निर्णय ले लिया गया। कार्यालय प्रभारी व मंत्री डा. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार चयन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अब सिर्फ घोषणा ही शेष है।
परिषद का संविधान
संशोधित कर पद सृजन :
परिषद का मुख्यालय व गवर्निग बाडी काशी में होगी। विस्तार को देखते हुए मुख्य कार्यकारिणी भी विस्तृत की जाएगी। इसके लिए संविधान में संशोधन किया जाएगा। इसमें पांच उपाध्यक्ष व मंत्री के पद पांच से बढ़ाकर आठ किए जाएंगे। प्रवक्ता पद दो से बढ़ा कर तीन किए जाएंगे। प्रचार मंत्री के तीन नए पद सृजित होंगे। संगठन मंत्री के पांच पदों में रिक्त तीन स्थान भी भरे जाएंगे।
महिला विदुषी भी पाएंगी स्थान :
महामहोपाध्याय आचार्य पं. शिव कुमार शास्त्री की ओर से 1916 में स्थापित परिषद में पहली बार महिला विदुषी भी स्थान पाएंगी। इसमें बुंदेलखंड, इलाहाबाद, चित्रकूट समेत अन्य जिलों से भी सदस्य व पदाधिकारी बनाए जाएंगे।
परिषद का होगा अपना भवन :
परिषद का अपना भवन होगा। इसके लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है आठ दिसंबर को इसकी घोषणा कर दी जाएगी। इसका शिलान्यास आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत करेंगे।
प्रांत जिनमें फैलेंगी शाखाएं :
बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, नई दिल्ली, मणिपुर, मिजोरम, आंध्रप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उड़ीसा, कर्नाटक, पांडिचेरी, त्रिपुरा, असम।