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वाराणसी के घाट के आगे फीकी पड़ी इंग्लैंड की खूबसूरती, कैंब्रिज की वैज्ञानिक डॉ. रोमेरो को भायी काशी

Published: Sun, 01 Nov 2026 09:01 PM (IST)

इवोल्यूशनरी बायोलाजी की वैज्ञानिक डॉ. एरीन गैलेगो रोमेरो ने कैंब्रिज से वाराणसी तक की अपनी यात्रा और अनुभवों को साझा किया है।

वैज्ञानिक डॉ. एरीन गैलेगो रोमेरो।

वैज्ञानिक डॉ. एरीन गैलेगो रोमेरो।

HighLights

  1. वैज्ञानिक डॉ. एरीन गैलेगो रोमेरो का काशी अनुभव।

  2. कैंब्रिज से बनारस तक की आध्यात्मिक यात्रा।

  3. काशी को जीवन का अविराम उत्सव बताया।

वाराणसी। इवोल्यूशनरी बायोलाजी का अध्ययन करते हुए जीवन का बड़ा हिस्सा प्रयोगशालाओं और किताबों के बीच बीता। स्पेन से कैंब्रिज यूनिवर्सिटी पहुंची तो वहां की ऐतिहासिक लाइब्रेरी में प्राचीन भारतीय सभ्यताओं से जुड़े दस्तावेजों ने ध्यान खींचा। मार्क ट्वेन सहित अनेक यात्रियों के संस्मरणों में बनारस के प्रति श्रद्धा और आकर्षण देखकर इस नगरी को जानने की जिज्ञासा बढ़ी। किताबों में पढ़ा यह शहर धीरे-धीरे मेरे भीतर एक चाह बन गया।

कैंब्रिज में शोध पूरा करने के बाद मेलबर्न विश्वविद्यालय में वरिष्ठ विज्ञानी के रूप में काम करने लगी। इसी दौरान भारत में आनुवंशिकी और प्राचीन डीएनए पर शोध करने वाले प्रतिष्ठित नेटवर्क 'ऐडनेट' के वैज्ञानिक सम्मेलन का निमंत्रण मिला। सम्मेलन काशी हिंदू विश्वविद्यालय में होना था। वर्षों से संजोया स्वप्न साकार हुआ और कुछ ही सप्ताह बाद मैं उस नगरी में थी, जिसे अब तक किताबों में जाना था।

काशी पहुंचकर महसूस हुआ कि यह शहर किसी परिभाषा में नहीं बंधता। स्पेन के ऐतिहासिक नगर अपनी वास्तुकला और उत्सवधर्मिता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बनारस स्वयं जीवन का अविराम उत्सव है। अस्सी से दशाश्वमेध घाट की ओर बढ़ते हुए एक तरफ आरती के शंखनाद, घंटियों की गूंज और दीपों की पंक्तियां थीं, तो दूसरी ओर मणिकर्णिका पर जलती चिताएं। स्पेनिश समाज में मृत्यु निजी शोक का विषय है, लेकिन काशी में वह जीवन से अलग नहीं। यहां दोनों का सह-अस्तित्व अस्तित्व के गहरे अर्थों से रूबरू कराता है।

घाटों पर स्पेन के वालेंसिया से आए कार्लोस और एलेना से मुलाकात हुई। वे पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों से विवाह करने काशी आए थे। उनका मानना था कि हजारों वर्षों की सभ्यता की साक्षी इस नगरी में रिश्ते की शुरुआत आत्मिक प्रतिबद्धता का प्रतीक होगी। गंगा तट पर अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेना उनके लिए विशेष अनुभव था। एलेना की आंखों में काशी के प्रति श्रद्धा देखकर लगा कि यह नगरी भूगोल, धर्म और देश की सीमाओं से परे है। यह उन सभी की हो जाती है, जो जीवन और प्रेम में शाश्वत तत्व तलाशते हैं। वैज्ञानिक सम्मेलन के बीच समय निकालकर सारनाथ पहुंची तो काशी का एक अलग रूप सामने आया। धमेख स्तूप के सामने खड़े होकर विचार आया कि यहीं ढाई हजार वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने धर्मचक्र प्रवर्तन किया था।

सुबह की गुलाबी धूप, गलियों की कुल्हड़ वाली चाय, गंगा की लहरें और सारनाथ का मौन अब मेरी स्मृतियों का हिस्सा हैं। कैंब्रिज की लाइब्रेरी में किताबों के सहारे जिस शहर को खोजा था, वास्तविक काशी उससे कहीं अधिक विराट, रहस्यमयी और आत्मीय निकली। स्पेन मेरी जन्मभूमि है, आस्ट्रेलिया कर्मभूमि, लेकिन काशी मेरी चेतना का हिस्सा बन गई है। विज्ञान भौतिक सवालों के उत्तर खोजता है, मगर जीवन के अर्थ से जुड़े कुछ प्रश्नों का उत्तर गंगा के घाटों का मौन दे जाता है। यही अनुभूति काशी को कालजयी बनाती है।

(डॉ. एरीन गैलेगो रोमेरो- लेखिका इवोल्यूशनरी बायोलाजी की विज्ञानी एवं सेंट विंसेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च, ऑस्ट्रेलिया में प्रोफेसर हैं।)

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