एकनाथ शिंदे ने वाराणसी में कहा, सनातन धर्म भारत की पहचान, युवाओं की शक्ति से बनेगा महान राष्ट्र
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वाराणसी में संस्कृति संसद में कहा कि सनातन धर्म सत्य, न्याय और मानवीय मूल्यों पर आधारित है, जो भारत की पहचान है।

एकनाश शिंदे ने युवाओं की शक्ति और संतों के आशीर्वाद से भारत को विश्व शक्ति बनाने का आह्वान किया।
HighLights
एकनाथ शिंदे ने सनातन धर्म को भारत की पहचान बताया।
युवा शक्ति और संतों के आशीर्वाद से भारत बनेगा महान।
महाराष्ट्र में गोमाता को राज्यमाता का दर्जा दिया गया।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। समय और सत्ताएं बदलती हैं, लेकिन सनातन संस्कृति का प्रवाह नहीं रुकता। सनातन धर्म सत्य, न्याय, करुणा और मानवीय मूल्यों पर आधारित है। यह तोड़ना नहीं, जोड़ना सिखाता है।
सियासत से बड़ा सिद्धांत, सत्ता से बड़ा सत्य और अन्याय से बड़ा धर्म होता है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को संस्कृति संसद में कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, संस्कार और सनातन परंपरा से है। संतों के आशीर्वाद, युवाओं की शक्ति और शासन के सेवा-संकल्प से भारत विश्व की महान शक्ति बनेगा। सनातन संस्कृति पर वैचारिक प्रहारों का जवाब एकजुट होकर देना होगा।
काशी और महाराष्ट्र के आध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा और गोदावरी उत्तर-दक्षिण को भक्ति के सूत्र में जोड़ती हैं। समाज को दिशा संत और धर्माचार्य देते हैं। बताया कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बना, जिसने गोमाता को राज्यमाता का दर्जा दिया।
गो-संवर्धन को किसान की आय, जैविक खेती और ग्रामीण समृद्धि से जोड़ना जरूरी है। पालघर में साधुओं की हत्या के बाद धर्म और सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय उन्होंने सत्ता छोड़ने का निर्णय लिया था। त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने का संकल्प भी जताया।
अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, अखिल भारतीय गंगा महासभा और श्री काशी विद्वत परिषद की ओर से शिंदे को ''''सनातन धर्म ध्वज संवाहक'''' की उपाधि प्रदान की गई। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती और प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने सम्मानित किया। तमिलनाडु के अधीनम समूह ने उन्हें राजदंड स्वरूप सेंगोल भेंट किया।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल ने कहा कि ''''स्टूडेंट पावर इज नेशन पावर''''; युवाओं की ऊर्जा और क्षमता से 2047 से पहले भारत को महान राष्ट्र बनाने का लक्ष्य पूरा हो सकता है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने विदेशी शक्तियों पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सांस्कृतिक चेतना जगाने में संत समाज की भूमिका रेखांकित की।
टीएमसी की पूर्व सांसद डा. काकोली घोष दस्तीदार ने भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों का आरोप लगाया और बच्चों में सांस्कृतिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करने पर बल दिया। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद ने विश्व शांति और सद्भाव के लिए नई पीढ़ी को सनातन संस्कारों से जोड़ने की बात कही।
आठ सत्रों में राष्ट्रहित और युवा शक्ति पर विमर्श
दूसरे दिन आठ सत्रों में शास्त्रों की प्रामाणिकता, अखंड भारत, राष्ट्रहित, सुरक्षित सीमाओं, आंतरिक सुरक्षा और विकसित भारत में युवा शक्ति की भूमिका पर चर्चा हुई। रक्षा एवं सामरिक विशेषज्ञ नरेश कुमार सूद ने आंतरिक सुरक्षा पर विचार रखे, जबकि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने युवा शक्ति से जुड़े सत्र की अध्यक्षता की।
समानांतर मंच पर आयोजित युवा विमर्श (जेन जी कान्क्लेव) में भारतीय ज्ञान परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी पर चर्चा हुई। इसमें पश्चिम बंगाल के विधायक संतु पान ने राष्ट्र निर्माण व कर्तव्यबोध, अखंड प्रताप ने गुरुकुल परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने तथा शिवेश प्रताप सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा और धर्म के व्यापक अर्थ पर विचार रखे।
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