राष्ट्ररत्न जिंदा रहते तो नहीं होता देश का विभाजन

-बाबू शिव प्रसाद गुप्त की जयंती पर काशी विद्यापीठ ने अर्पित किया श्रद्धासुमन

-भारतीय शिक्षा को प्रदान की एक नई दिशा : प्रो. आनंद कुमार त्यागी

जागरण संवाददाता, वाराणसी : महात्मा गांधी से राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त की काफी घनिष्ठता थी। यदि देश की आजादी के समय तक राष्ट्ररत्न जिंदा रहते तो देश का विभाजन नहीं होता।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में मंगलवार को आयोजित राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त की जयंती समारोह में ये बातें उनके प्रपौत्र डा. अंबुज गुप्त ने कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्ररत्न एक अच्छे निशानेबाज भी थे। उन्होंने जर्मन में आयोजित निशानेबाजी प्रतियोगिता जीती थी। वह कुश्ती के भी दांव-पेच बखूबी जानते थे। अपने समय में उन्होंने अच्छे-अच्छे पहलवानों को पटखनी दी थी। यह बात और है कि हंसी मजाक में वह बनारस के राजा से कुश्ती हार जाया करते थे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि बाबू शिवप्रसाद गुप्त ने भारतीय शिक्षा को एक नई दिशा प्रदान की। कहा कि बाबू शिवप्रसाद द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। स्वागत छात्रसंघ उपाध्यक्ष शिव जनक गुप्ता, संचालन रजनीश कुमार चौरसिया व धन्यवाद ज्ञापन छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष प्रेम प्रकाश गुप्त ने किया। इससे पहले कुलपति व शिक्षकों ने बाबू शिवप्रसाद गुप्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया।

मंचकला विभाग ने दी स्वरांजलि

बाबू शिव प्रसाद गुप्त की जयंती व स्वरकोकिला भारतरत्न लता मंगेशकर की स्मृति में मंचकला विभाग ने स्वरांजलि दी। इस दौरान मंच कला के विद्यार्थियों ने सुमधुर गीतो... नाम गुम जाएगा..., तू जहां-जहां चलेगा... आपकी नजरों ने समझा.. सहित लता के अन्य गीतों की प्रस्तुति की। मुख्य अतिथि मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो.योगेंद्र सिंह थे। स्वागत विभाग की प्रभारी डा. संगीता घोष, संचालन विनोद कुमार व धन्यवाद ज्ञापन डा. आकांक्षी ने किया।

Edited By: Jagran