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एयरशो र‍िहर्सल के दौरान नमो घाट के सामने गंगा की लहरों के ऊपर मंडराया दो रोटर वाला च‍िनूक हेलीकाप्‍टर, थम गई लोगों की सांसें

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 21 Oct 2026 01:32 PM (IST)

वाराणसी में एयरशो के रिहर्सल के दौरान नमो घाट के ऊपर चिनूक हेलीकॉप्टर को देखकर लोग हैरान रह गए। यह ...और पढ़ें

वाराणसी एयरशो रिहर्सल में नमो घाट पर दिखा चिनूक हेलीकॉप्टर।

वाराणसी एयरशो रिहर्सल में नमो घाट पर दिखा चिनूक हेलीकॉप्टर।

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जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी में एयरशो के र‍िहर्सल के दौरान बुधवार की दोपहर च‍िनूक हेलीकाप्‍टर को गंगा के ऊपर नमोघाट के ठीक सामने देखकर लोगों की एकबारगी सांसें थम गईं। दरअसल चिनूक (CH-47F(I)) भारी वजन ढोने वाला अमेरिकी मूल का हेलीकॉप्टर 25 मार्च 2019 को भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल किया गया था। तब इसको चंडीगढ़ एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित एक समारोह में शामिल किया गया था, उसके बाद से ही यह भारतीय सेना में सेवारत है।

भारत सरकार ने सितंबर 2015 में अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ 15 चिनूक हेलीकॉप्टरों की खरीद का सौदा किया था। इसका पहला जत्था 10 फरवरी 2019 को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था। यह जुड़वां-रोटर (Twin-rotor) वाला भारी लिफ्ट हेलीकॉप्टर है, जो 11 टन तक वजन और 45 से अधिक सैनिकों को ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में आसानी ले जा सकता है।

बोइंग CH-47 चिनूक (Boeing CH-47 Chinook) एक अमेरिकी मूल का दोहरे इंजन और टेंडम-रोटर (दो रोटर) वाला भारी भरकम (Heavy-Lift) हेलीकॉप्टर है, जिसे मुख्य रूप से दुर्गम इलाकों में भारी सैन्य साजो-सामान और सैनिकों को ले जाने के लिए तैयार किया गया है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में इसका सबसे आधुनिक वेरिएंट CH-47F को शामिल क‍िया गया है। 

 इसमें पारंपरिक हेलीकॉप्टरों की तरह पूंछ (Tail) पर रोटर नहीं होता है। इसके बजाय इसमें दो मुख्य रोटर (आगे और पीछे) होते हैं जो विपरीत दिशाओं में घूमते हैं। यह तकनीक हेलीकॉप्टर को अतिरिक्त लिफ्ट और थ्रस्ट प्रदान करती है, जिससे यह भारी से भारी वजन आसानी से उठा सकता है। चिनूक आंतरिक और बाहरी रूप से मिलाकर लगभग 10,000 से 11,000 किलोग्राम (11 टन तक) वजन उठाने में सक्षम है।

इसमें ट्रिपल-हुक कार्गो सिस्टम होता है, जिसकी मदद से यह भारी तोपें (जैसे M777 होवित्जर), बख्तरबंद गाड़ियां और भारी मशीनरी को नीचे लटकाकर (Under-slung) पहाड़ी इलाकों तक पहुंचा सकता है। यह एक बार में 45 से 55 पूरी तरह से हथियारों से लैस सैनिकों को ले जा सकता है। आपदा के समय या युद्ध क्षेत्र से घायलों को निकालने के लिए इसमें 24 स्ट्रेचर (मरीजों के लिए) और 3 चिकित्सा परिचारकों को एक साथ ले जाने की व्यवस्था है।

इसकी अधिकतम गति लगभग 315 किमी/घंटा है और यह दुनिया के सबसे तेज गति वाले हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है। उड़ान की ऊंचाई समुद्र तल से 20,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई तक ऑपरेट कर सकता है। ऑपरेशनल रेंज एक बार में लगभग 740 किलोमीटर की दूरी आसानी से तय कर सकता है। इसमें दो हनीवेल टर्बोशाफ्ट इंजन लगे होते हैं जो इसे काफी शक्ति देते हैं। इसे संचालित करने के लिए न्यूनतम 3 क्रू मेंबर्स के तौर पर पायलट, को-पायलट और फ्लाइट इंजीनियर या लोडमास्टर की जरूरत पड़ती है। 

इसमें एक आधुनिक एकीकृत डिजिटल कॉकपिट मैनेजमेंट सिस्टम (Common Aviation Architecture Cockpit) लगा हुआ है। यह रडार चेतावनी प्रणाली, उन्नत संचार प्रणालियों और खुद के बचाव के लिए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (Self-defence suite) से लैस है। जमीनी खतरों से निपटने के लिए इस पर M240 और GAU-21 मशीन गन भी तैनात की जा सकती हैं।

यह हेलीकॉप्टर सिर्फ सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। अपनी आधुनिक बनावट के कारण यह घनी घाटियों और छोटे पहाड़ी हेलीपैड पर भी आसानी से उतर सकता है। इसका उपयोग खोज और बचाव (Search & Rescue), प्राकृतिक आपदाओं में राहत सामग्री पहुंचाने और घायलों को एयरलिफ्ट करने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।