वाराणसी, जेएनएन। जिले में कानून का राज कायम हो और पीडि़तों को त्वरित न्याय मिले यही पुलिस विभाग के अधिकारियों की प्राथमिकता होती है, मगर इस दिशा में कितना व क्या कार्य होता है यह अधिकारी की टीम व उनकी योजनाओं पर निर्भर करता है। जिम्मेदार अफसर जब खुद उसकी समीक्षा करे तो कहीं न कहीं पीडि़तों में न्याय की आस जगती है। कुछ ऐसा ही एसएसपी कार्यालय के फीडबैक सेल में देखने को मिलता है, जहां थाना व चौकी स्तर से सुनवाई न होने पर पीडि़त पुलिस कप्तान का दरवाजा खटखटाते हैं।

कार्यालय में सुनवाई संग फीडबैक

एसएसपी ने कार्यालय से थानों व चौकी तक एक कार्यपद्धति बना रखी है। इसके बाद भी न्याय न मिले या फिर कार्रवाई नहीं होती तो कोई पीडि़त उनके कार्यालय आ सकता है। समस्याओं को सुनने और निस्तारण के लिए संबंधित थाना प्रभारियों को निर्देशित करने तक उनका काम समाप्त नहीं होता। कप्तान ने अपने कार्यालय में फीडबैक सेल बनाया है। प्रार्थना पत्रों पर पीडि़तों के फीडबैक लिए जाते हैं। कोई फरियादी संतुष्ट नहीं है तो कारण पूछकर संतुष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

एसएसपी संग अन्य करते निगरानी

कार्यालय में फीडबैक सेल की निगरानी एसएसपी अमित पाठक खुद करते हैं, मगर टीम का मुख्यत: नरसिंह ओझा को प्रभारी बनाया गया है। अंजली सिंह, सुशील सिंह, अशोक मौर्या, विभूति नारायण और मुरली आदि भी सेल को प्रभावी रूप दे रहे हैं।

अपराध शून्य रहे इसके लिए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं

पीडि़तों को न्याय मिले व अपराध शून्य रहे इसके लिए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले हर एक व्यक्ति की समस्या सुनें और सही है तो समाधान भी करें। अगर थाने की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं तो मेरे पास आ सकते हैं। मामला सुनने के बाद कार्रवाई का निर्देश देते हैं। इसका पालन हुआ या नहीं, पीडि़त पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट है या नहीं, इन सबके लिए फीडबैक सेल काम कर रहा है जो मेरी निगरानी में संचालित है।

- अमित पाठक एसएसपी, वाराणसी

केस एक

पहडिय़ा निवासी संजय सिंह ने शिकायत पत्र दिया था कि मिर्जामुराद स्थित उनकी जमीन पर 12 फीट का गेट लगाया जा रहा है था, जिस पर विपक्षी विवाद करने को आतुर हैं। एसएसपी ने थाना प्रभारी को स्वयं मामला देखने का निर्देश दिया था। जब फीडबैक सेल ने मामले की जानकारी ली तो आवेदक ने बताया कि एसओ ने मौके पर आकर विवाद खत्म करा दिया।

केस दो

मंडुआडीह निवासी दिनेश ने शिकायत की थी कि एक प्राइवेट कंपनी में चेक से पैसा जमा किया था। पैसा नहीं मिला और थाने पर सुनवाई नहीं हो रही। इस पर एसएसपी ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर आगे कार्रवाई का निर्देश दिया था। फीडबैक सेल ने आवेदक से अपडेट लिया तो उन्होंने बताया कि थाने पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

केस तीन

सिंधोरा की एक पीडि़ता ने एसएसपी कार्यालय पर फरियाद लगाई कि ससुराल पक्ष की ओर से प्रताडि़त किया जा रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने महिला प्रकोष्ठ को जांच कर कार्रवाई करने के लिए कहा। एसआइ प्रियंका सिंह ने इस मामले का समाधान कराया। फीडबैक सेल ने जब पीडि़ता से पूछा तो उसने बताया कि अब मैं अपने परिवार में वापस आ गई हूं।

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