भारतीय सेना में जाना चाहते थे ध्रुव जुरेल, बनारस में किया खुलासा, बोले- पिता कारगिल के वेटरन
भारतीय क्रिकेटर ध्रुव जुरेल ने वाराणसी में अपने संघर्ष और क्रिकेट तक के सफर को साझा किया, युवाओं को बड़े सपने देखने और मेहनत करने का संदेश दिया।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित स्वतंत्रता भवन में आयोजित माई भारत युवा सम्मेलन में बोलते क्रिकेटर ध्रुव जुरेल। पीआईबी
HighLights
ध्रुव जुरेल ने संघर्ष और क्रिकेट यात्रा साझा की।
बचपन में भारतीय सेना में जाने का सपना था।
युवाओं को बड़े सपने देखने और मेहनत का संदेश।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। भारतीय क्रिकेटर ध्रुव जुरेल ने अपने जीवन के संघर्ष और क्रिकेट तक पहुंचने के सफर को साझा करते हुए युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि उनके दादा किसान थे, जबकि उनके पिता कारगिल युद्ध के वेटरन रहे हैं।
ध्रुव जुरेल शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत मेरा युवा भारत की ओर से आयोजित ‘यूथ फार विकसित भारत’ सम्मेलन में बोल रहे थे।
भारतीय सेना में जाने का था सपना
परिवार की पृष्ठभूमि और पिता के सेना से जुड़ाव के कारण बचपन में उनका सपना भी भारतीय सेना में जाने का था। ध्रुव जुरेल ने कहा कि आमतौर पर हर मध्यमवर्गीय परिवार की इच्छा होती है कि उनका बेटा अच्छी सरकारी नौकरी हासिल करे और जीवन में स्थापित हो जाए। उनके परिवार की भी ऐसी ही अपेक्षाएं थीं, लेकिन उनकी रुचि क्रिकेट में थी। उन्हें बचपन से ही क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था। इसके लिए उन्होंने कई बार अपने माता-पिता से क्रिकेट खेलने की अनुमति मांगी।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट में आगे बढ़ना आसान नहीं है। इस खेल में बहुत से लोग अपना करियर बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही खिलाड़ियों को देश के लिए खेलने का अवसर मिल पाता है। उन्होंने भारतीय टीम का हिस्सा बनने का मौका मिलने पर अपने माता-पिता और ईश्वर के प्रति आभार जताया।
अपनी जड़ों से जुड़े रहिए: जुरेल
ध्रुव जुरेल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “खुद पर विश्वास बनाए रखिए। बड़े सपने देखिए और उन्हें हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दीजिए। इसके साथ ही हमेशा विनम्र बने रहिए और अपनी जड़ों से जुड़े रहिए।”
उन्होंने कहा कि सफलता हासिल करने के लिए आत्मविश्वास, मेहनत और विनम्रता बेहद जरूरी हैं। उनका संदेश था कि युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए और सफलता मिलने के बाद भी अपने संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए।
