वाराणसी [प्रमोद यादव]। पर्व उत्सवों के रसिया शहर बनारस का त्योहारों को मनाने और सजाने का अंदाज भी जुदा है। इसे समझना-जानना और महसूसना हो तो कार्तिक पूर्णिमा की शाम गंगा के घाटों पर निकल आइए। चार माह से चल रहे त्योहारी सीजन के अंतिम उत्सव का आनंद उठाइए। ज्योति गंगा में डुबकी लगाइए और श्रद्धा-भक्ति के दिव्य नजारे के दर्शन को जमीन पर उतर आए सितारों को गले लगाईए।

काशी के अनूठे जल उत्सव के रूप में ख्यात देव दीपावली के मौके पर उत्तरवाहिनी गंगा के घाटों पर कुछ ऐसा ही नजारा आम होगा। इसके लिए एक दिन पहले ही गंगा के घाट चमक गए हैैं, भवनों रंग-रोगन से दमक रहे तो विद्युत झालरों की आभा से चमक रहे। सीढिय़ों से लेकर मढिय़ों तक दीया-बाती तैयार हैैं। अब सिर्फ पूर्णिमा की शाम का इंतजार है जब गंगा समेत नदियों व सरोवर कुंडों के तट पर लाखों दीपों की माला जगमगाएगी। धूप -दीप, गुगुल-लोबान की सुवास श्रद्धा के भाव जगाएगी।

वास्तव में भारतीय सनातन समाज में तीज -त्योहार व उत्सवों का पट जेठ में रथयात्रा से खुलता है जो श्रीहरि को समर्पित मास कार्तिक में पर्वों के गुलदस्ते का आभास कराता है। महादेव की नगरी में इस माह का रंग कुछ अलग ही नजर आता है। पूरे माह स्नान-विधान और उत्सव-ध्यान सब कुछ श्रीहरि के नाम तो बैकुंठ चतुर्दशी पर 'हरि चरणों में बिल्व पत्र, 'हर के मस्तक पर तुलसी सजाकर हरिहर रूप सजाता है। कार्तिक के अंतिम दिन पूर्णिमा पर जल उत्सव संग तीज-त्योहारों का सिलसिला थमता है और मकर संक्रांति का इंतजार रह जाता है। इस खास मौके को लोक मन बड़े ही मिजाज के साथ मनाता है। इसके पीछे पौराणिक कथा भी है कि भगवान शिव ने त्रिपुर राक्षस का संहार किया तो देवताओं ने उल्लास में देवदीपावली मनाई।

स्मृति स्तंभ सरीखा हजारा

काशी में देवदीपावली मनाये जाने के आरम्भ के साथ धर्मपरायण महारानी अहिल्याबाई होलकर का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि उनके ही बनाये हजारा दीपस्तंभ (एक हजार एक दीपों का स्तंभ) से पंचगंगाघाट पर देवदीपावली मनाने का प्रारम्भ हुआ। इसे व्यापक बनाने में काशीनरेश महाराज विभूतिनारायण सिंह ने ऐतिहासिक योगदान किया। बाद में तमाम श्रद्धालु आगे आते और महत्वपूर्ण भूमिका निभाते चले गये। आज इसकी ख्याति काशी के चार लक्खा मेलों से भी कहीं अधिक हो चली है। इसे विस्तार देने को शासकीय स्तर पर साज सज्जा हो रही है।

पुरखों की अभ्यर्थना और गीत गंगा

पुरखों-शहीदों की अभ्यर्थना की अवधारणा ने देव दीपावली को जन-जन के हृदय से जोड़ा। कार्तिक के पहले दिन से शहीदों के नाम आकाशदीप जलाए जाते हैैं तो पूर्णिमा पर समारोह पूर्वक समापन किया जाता है। कार्तिक एकादशी से राजघाट पर चार दिवसीय गंगा महोत्सव के रूप में गीत गंगा प्रवाह पा रही है। देव दीपावली पर हंसराज हंस व भजन सोपोरी प्रस्तुति देंगे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां मंच पर होंगे।

होटलों में रौनक, बजड़े तैयार

देव दीपावली की रंगत निरखने देश विदेश से सैलानियों का दल आ चुका है। इससे पहले से ही बुक चल रहे होटलों में रौनक है। बजड़े वालों ने भी सैलानियों को दोपहर में स्थान संभाल लेने का संकेत दे दिया है।

घाटों पर सजेगा लघु भारत

देव दीपावली पर दशाश्वमेध, अस्सी, राजघाट समेत अन्य घाटों पर उत्सवी रंगत तो होगी ही 16 घाटों पर लघु भारत सजेगा । इसमें रविदास घाट पर रामलीला, रीवा घाट पर बिरहा, निषादराज घाट पर घूमर व चरी लोक नृत्य, चेतसिंह घाट पर भजन होंगे। महानिर्वाणी, हनुमान घाट, चौकी घाट, राजाघाट, पांडेय घाट, दरभंगा घाट, सिंधियाघाट, रामघाट, लालघाट, गायघाट, बद्रीनारायण घाट, नंदेश्वर घाट पर भी प्रस्तुतियां होंगी।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021