वाराणसी, जेएनएन। काशी गंगा महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को ताल के कमाल से गंगा का किनारा निहाल हो उठा। घाट की सीढि़यों पर डटे संगीत रसिकों ने सुर-लय-ताल की त्रिवेणी में गोता लगाया। तालियों से तो हर हर महादेव के उद्घोष से भी राजघाट (भैंसासुर घाट) को गुंजाया। पद्मश्री प्रो. येल्ला वेंकटेश्वर राव मंच पर उतरे और उनकी हथेलियों व कलाइयों का जादू दिलों में उतरता नजर आया। छत्तीस घंटे लगातार वादन कर गिनीज बुक आफ व‌र्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करा चुके प्रो. येल्ला ने 72 साल की उम्र में अपनी फुर्ती से अचरज में डाल दिया। मुंबई की अनुराधा पाल ने तबले पर तीन ताल में वादन से मुग्ध किया।

अ‌र्द्धनारीश्वर आधारित जुगलबंदी से चौंकाया तो बनारस घराने की कुछ खास बंदिशें बजाई। नमामि गंगे का भी प्रदर्शन किया। कैलाश मिश्र ने तबले पर तीन ताल में वादन किया। शास्त्रीय गायिका डा. मधुमिता भट्टाचार्य ने राग यमन में एक ताल विलंबित ख्याल आली रे मोरे पिया.. व तीन ताल द्रुत ख्याल मैं वारी वारी जाऊं प्रीतम पर.. को स्वर दिया। राग मिश्र खमाज जत ताल की ठुमरी सांवरिया को देखे बिना नाहीं चैन.. से विभोर किया। राग कौशिक ध्वनि में दादरा श्याम तोहे नजरिया लग जाएगी.. और भजन पतित उद्धारिणी गंगे मां.. से समापन किया। गणेश पाठक ने राग चारु केशी में जटा जूट त्रिपुरारी.. समेत भजन प्रस्तुत किए। नगर आयुक्त गौरांग राठी ने दीप जलाकर शुभारंभ किया। संयुक्त निदेशक पर्यटन अविनाश चंद्र मिश्र ने स्वागत व पर्यटन अधिकारी कीर्तिमान श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

महोत्सव में आज

आशुतोष श्रीवास्तव : भजन गायन

देश बैंड : शास्त्रीय फ्यूजन

दिव्या शर्मा : शास्त्रीय गायन

नादार्चन बैंड : फ्यूजन इंस्ट्रूमेटल

अनूप जलोटा : भजन गायन

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