वाराणसी [विनोद पांडेय]। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में पेयजल परियोजना में हुई धांधली की आंच लखनऊ तक पहुंच रही है। नगर विकास मंत्री रहे आजम खां के कार्यकाल में परियोजना से जुड़ी उन फाइलों को खंगाला जाएगा जिसमें मैटेरियल मैनेजर कार्यालय से सामग्रियों की खरीद हुई है। पेयजल परियोजना में वित्तीय धांधली की जांच करने लखनऊ से आई छह सदस्यीय टीम को छह दिन की जांच में 10 फीसद दस्तावेज गायब मिले। इस दौरान एकाउंट से जुड़े दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी भी उजागर हुई। छह दिन के जांच में यह भी जानकारी हुई कि परियोजना में प्रयुक्त सामग्रियों की खरीद लखनऊ में उस वक्त हुई थी जब प्रदेश में सपा सरकार थी और नगर विकास मंत्री आजम खां थे। पूर्व में हुई टीएसी, एमडी जल निगम, कमिश्नर वाराणसी की जांच में स्पष्ट हो चुका है कि परियोजना में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता असंतोषजनक है। 

सहायक अभियंता भी कटघरे में खड़ा करेंगे लखनऊ कार्यालय को

परियोजना में गड़बड़ी को लेकर कार्रवाई की जद में अधीक्षण अभियंता आरपी पांडेय, अधिशासी अभियंता अनिल कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता अमरेश चंद्र दुबे, अधिशासी अभियंता सतीश कुमार, सहायक अभियंता संजय कुमार, सहायक अभियंता डीएन तिवारी, सहायक अभियंता बीपी मौर्या, सहायक अभियंता अनूप सिंह आदि अफसर हैं। सभी को फाइनल चार्जशीट का इंतजार है। सहायक अभियंताओं ने तय किया है कि फाइनल चार्जशीट मिलने पर लगे आरोपों के अनुसार जबरदस्त जवाब देंगे। कहना है कि हम लोगों ने सिर्फ काम कराया है लेकिन सामग्रियों की खरीद तो लखनऊ से हुई है। छोटे-छोटे ठेकेदारों से कार्य कराने की अनुमति भी लखनऊ स्थित मुख्यालय से दी गई है। गड़बडिय़ों के मूल में लखनऊ से लिए गए फैसले हैं तो सहायक अभियंताओं को क्यों फंसाया जा रहा है। 

निलंबित अफसरों पर प्राथमिक आरोप

-कर्तव्यों व दायित्वों का अनुपालन न करना

-कराए गए कार्यों की गुणवत्ता अत्यंत असंतोषजनक होना

-कार्यों को करने के लिए छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट कर कई ठेकेदारों के माध्यम से कार्य कराना

-योजना का गलत क्रियान्वयन कर शासकीय धन का दुरुपयोग करना

-योजना का गलत क्रियान्वयन कर शासकीय धन का दुरुपयोग करना

-विभाग की छवि धूमिल व कर्मचारी आचरण प्रावधान का उल्लंघन करना

आखिरी दिन अफसरों से पूछताछ

26 से 31 अगस्त तक चली जांच में आखिरी दिन शनिवार को वित्तीय धांधली की जांच कर रही आडिट टीम ने उन अफसरों से पूछताछ की जो इस परियोजना से जुड़े हुए हैं और कार्रवाई से बाहर हैं। इसमें आधा दर्जन महिला जूनियर इंजीनियर थीं। सभी से ज्वाइंनिंग से लेकर अब तक किए कार्यों की जानकारी ली गई। वित्तीय लेन-देन को लेकर पूछताछ हुई और दस्तावेज भी मांगे गए। जांच टीम की यह कवायद सुबह 10 से शाम चार बजे तक हुई। इसके बाद टीम जरूरी दस्तावेज लेकर रवाना हुई। दो सितंबर तक जल निगम मुख्यालय को रिपोर्ट सौंपने की बात कही जा रही है। 

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