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वाराणसी में देश का पहला समुद्र की जगह नदी का 'शिप रिपेयरिंग सेन्टर' का निर्माण शुरू, खोलेगा जल पर‍िवहन की नयी राह

By Jashwant SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 13 Sep 2026 03:37 PM (IST)

वाराणसी में देश के पहले नदी आधारित शिप रिपेयरिंग सेंटर का निर्माण शुरू हो गया है। यह आईडब्लूएआई की पहल ...और पढ़ें

वाराणसी में शुरू हुआ भारत का पहला नदी शिप रिपेयरिंग सेंटर निर्माण, जल परिवहन को मिलेगी नई गति।

वाराणसी में शुरू हुआ भारत का पहला नदी शिप रिपेयरिंग सेंटर निर्माण, जल परिवहन को मिलेगी नई गति।

HighLights

  1. वाराणसी में देश के पहले नदी शिप रिपेयरिंग सेंटर का निर्माण।

  2. रामनगर में आईडब्लूएआई ने 4 बीघा क्षेत्र में शुरू किया कार्य।

  3. यह केंद्र जलयानों की मरम्मत कर जल परिवहन को गति देगा।

जागरण संवाददाता (रामनगर) वाराणसी। फ्रेट विलेज बनाने की ओर अग्रसर आईडब्लूएआई (इनलैंड वाटरवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया) ने एक कदम और बढ़ा दिया है। शनिवार को बंदरगाह के उत्तरी छोर पर 4 बीघा क्षेत्र में बनने वाले शिप रिपेयरिंग सेन्टर का श्रीगणेश हो गया है। इसके साथ ही काशी देश का पहला शहर होगा जहां समुद्र की जगह नदी में जलयानों की मरम्‍मत की जाएगी।  

कार्यदायी संस्था लार्सन एन्ड टुब्रो जिओ स्ट्रक्चर के कर्मचारियों ने प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया है। यहां जहाजों को रिपेयर करने के लिए उत्त्तरी छोर पर एक वाटर चैनल बनाया जाएगा जहा जहाज नदी की मुख्य धारा से अंदर चैनल में रिपेयर होने के लिए आएंगे।

कार्यदायी संस्था फिलहाल रिपेयर फैसिलिटी के प्लेटफार्म को बनाने का काम कर रही है उनके मुख्य अभियंता रमेश जोशी ने बताया कि प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा करना है। बताया क‍ि बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन प्रोजेक्ट को जल्दी खत्म करने के लिए जल्दी ही काम शुरू करना पड़ा।

इस बाबत उन्होंने बताया कि देश मे किसी भी नदी पर बनने वाला यह पहला शिप रिपेयरिंग सेंटर है। यहां कुछ जहाजों को क्रेन के माध्यम से ड्राई डाक सूखी सतह पर लाकर रिपेयर करने की सुविधा होगी। इसके साथ ही जहाज में पानी की सतह से ऊपर की खराबी को नदी में ही ठीक कर दिया जाएगा।

बताया क‍ि देश मे अभी तक शिप रिपेयरिंग सेन्टर समुद्रों के किनारे ही बनाये जाते है देश मे किसी नदी के ऊपर पहली बार शिप रिपेयरिंग सेन्टर बन रहा है। पहले जहाजों को रिपेयरिंग के लिए कलकत्ता जाना होता था जो अब बनारस में भी संभव है। जल्‍द न‍िर्माण पूरा होने के बाद इसे कार्यदायी संस्‍था को सौंप द‍िया जाएगा। 

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