वाराणसी [सौरभ चंद्र पांडेय]। चार माह तक न्याय पंचायत स्तर पर संगठन सृजन अभियान, फिर गांधी अधिकार यात्रा, उसके बाद युवाओं के रोजगार लिए हस्ताक्षर अभियान, कैलेंडर के माध्यम से प्रियंका गांधी वाड्रा का संघर्ष और किसानों व आम जनता से जुड़ी हर जमीनी समस्या को कांग्रेस की जिला और महानगर कमेटी सहित अन्य फ्रंटल दलों ने पिछले छह माह में सड़कों पर भरपूर भुनाया। लेकिन सब कुछ के बावजूद कांग्रेस जिला पंचायत के चुनाव में इसे वोटों में नहीं भुना सकी। इन सभी अभियानों का नेतृत्व पार्टी के कई बड़े नेताओं की ओर से किया जा रहा था। कई बार पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह और प्रदेश सचिव इमरान खान बनारस आकर सभी अभियानों की नब्ज भी टटोले थे। पार्टी की ओर से ऐसा कहा जा रहा था कि आगामी विधानसभा चुनाव 2022 के पहले जिला पंचायत के चुनाव को कांग्रेस सेमीफाइनल मानकर चल रही है। पार्टी के अभियान को धार देने के लिए भाजपा के समरसता भोज की तर्ज पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने स्थानीय नेताओं के साथ अस्सी पर मकर संक्रांति पर खिचड़ी समरसता भोज भी किए। लेकिन जिला पंचायत के चुनाव में कांग्रेस को कुछ हासिल नहीं हुआ। सारे जतन के बाद भी कांग्रेस को 40 में से मात्र 5 सीट ही मिल सका। फिर ऐसे तो बात बनने वाली नहीं है। अब देखना यह है कि कांग्रेस 2022 की बिसात कैसे बिछाती है।

जहां किए सबसे ज्यादा बैठक वहां नहीं मिली एक भी सीट

बात जिला पंचायत चुनाव की करें तो पार्टी की ओर से जिन ब्लॉकों में सबसे ज्यादा बैठक की गई थी वहां से पार्टी की झोली में एक भी सीट नहीं आयी। पार्टी के दो समर्थित प्रत्याशी बड़ागांव, दो पिंडरा और एक सेवापुरी से जीत दर्ज किए हैं। शेष ब्लॉक में पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी है। देखा जाए तो बड़ागांव और पिंडरा ब्लॉक से जो चार प्रत्याशी विजयी हुए हैं वह पूर्व विधायक अजय राय का क्षेत्र है। यानी पार्टी की अभी तक सबसे मजबूत स्थिति केवल पिंडरा विधानसभा में ही है। इस पर पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि हम 2015 में भी तीन सीटें जीते थे। बाद में एक प्रत्याशी के अपनादल में शामिल होने से हमारी संख्या 2 रह गयी थी। इस बार हम 5 सीट जीते हैं। हमारा मानना है कि जैसे ही कोरोना का कहर कम हो हम समीक्षा करके आगामी वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाएंगे। सभी संभावित प्रत्याशियों को कोरोना महामारी में अपने विधानसभा क्षेत्र में जनता की भरपूर सेवा करनी चाहिए। जनता के बीच जो रहेगा वही जाना जाएगा। जैसा कि इस चुनाव में पिंडरा विधानसभा में देखने को मिला।

महामारी का प्रकोप कम होते ही होगी समीक्षा

पार्टी के जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल भी कम सीट जीतने से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही महामारी का प्रकोप कम होगा पार्टी सभी स्थानीय नेताओं के साथ बैठक करके अपनी कमियों पर विचार करेगी।

महानगर अध्यक्ष को मिली थी युवाओं को रिझाने की जिम्मेदारी

पार्टी के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे को युवाओं को साथ जोड़ने की जिम्मेदारी मिली थी। देखा जाए तो जिला पंचायत के चुनाव में उनका भी जादू नहीं चला। हालांकि शहर में कुछ प्रभाव देखने को जरूर मिला है। जिसका नतीजा छात्रसंघ चुनाव में देखने को मिला। हालांकि राघवेंद्र चौबे अभी भी दम्भ भर रहे हैं कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी। जो कमी जिला पंचायत में हुई उसे सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई भाजपा से है न कि सपा से। भाजपा 7 सीटें जीती तो हम पांच। जहां हमें सीट नहीं मिली वहां हम दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे। लेकिन वहां वोट की मार्जिन में बहुत कम का अंतर रहा।