राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए संत समाज बनाएगा रणनीति, तीन दिनों तक होगा मंथन: जितेंद्रानंद सरस्वती
संस्कृति संसद 2026 में जितेंद्रानंद सरस्वती ने राष्ट्र और धर्म की रक्षा पर जोर दिया, कहा संत समाज तीन दिन ...और पढ़ें

संस्कृति संसद 2026: राष्ट्र और धर्म की रक्षा हेतु संत समाज बनाएगा ठोस रणनीति।
HighLights
राष्ट्र और धर्म की रक्षा पर संत समाज का मंथन।
चंपत राय के राम मंदिर योगदान पर जताया विश्वास।
युवाओं को सनातन धर्म से जोड़ने पर दिया जोर।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। संस्कृति संसद 2026 के उद्घाटन सत्र में आयोजन के शुभारंभ के अवसर पर जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्र और धर्म की रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और धर्म दो ऐसी कसौटियां हैं, जिनके आधार पर आगामी तीन दिनों तक संत समाज गंभीर मंथन करेगा।
उन्होंने कहा कि देश को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि, कर्मभूमि और पुण्यभूमि मानने वाले तथा इस देश की मिट्टी से उपजे सनातन हिंदू धर्म और उसके विभिन्न संप्रदायों के आचार्य, अखाड़ा परिषद, संत समिति और विद्वत परिषद के प्रतिनिधि यहां उपस्थित हैं। सभी मिलकर देश और धर्म के सामने खड़ी चुनौतियों पर विचार करेंगे और उनसे निपटने की रणनीति बनाएंगे।
जितेंद्रानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि देश में अस्थिरता और आग लगाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने 'रिजीम चेंज' की अवधारणा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के नाम पर देशविरोधी गतिविधियों के जरिए सत्ता पर कब्जा करने का प्रयास सफल नहीं होगा। उन्होंने देश के विभाजन की कथित साजिशों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का कोई भी हिस्सा अलग नहीं होने दिया जाएगा।
चंपत राय के योगदान पर जताया भरोसा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर पूछे गए सवाल पर जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संत समाज को उन पर पहले भी विश्वास था, आज भी है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि चंपत राय के योगदान का मूल्यांकन किसी पद या वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पिछले 35 वर्षों से चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और मुकदमे को पूरी निष्ठा के साथ जिया है। अयोध्या में 500 वर्षों के संघर्ष के बाद रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण साकार होने में श्रद्धेय अशोक सिंघल और उनके सहयोगी के रूप में चंपत राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक हिंदू ने राम मंदिर आंदोलन में योगदान दिया है। ऐसे में चंपत राय जैसे व्यक्ति पर आक्षेप लगाना उचित नहीं था। संत समाज का उन पर पहले भी भरोसा था और आगे भी बना रहेगा।
पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है व्यक्ति का जीवनभर का योगदान
जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि किसी व्यक्ति का किसी ट्रस्ट में बने रहना या पद छोड़ना अलग विषय है। कोई भी पद स्थायी नहीं होता और समय के साथ उसमें बदलाव होना स्वाभाविक है। लेकिन किसी व्यक्ति के पद पर बने रहने या पद छोड़ने को उसके जीवनभर के योगदान के मूल्यांकन का आधार नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय के प्रति संत समाज का विश्वास उनके पद से नहीं, बल्कि राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके लंबे संघर्ष, समर्पण और योगदान से जुड़ा है।
युवाओं पर जोर
संस्कृति संसद 2026 के उद्घाटन सत्र में आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता सुनील देवधर ने हिंदू समाज की चुनौतियों पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सनातन पर चारों ओर से हमले हो रहे हैं और इसका सबसे बड़ा निशाना आज का युवा है।
देवधर ने बताया कि सन 2014 में जब नरेंद्र मोदी काशी से चुनाव लड़ने वाले थे, तब अमित शाह ने उन्हें और सुनील ओझा को काशी भेजा था। उस समय केजरीवाल के समर्थन में शबाना आजमी समेत वामपंथी कलाकार आए और मोदी पर गालियां बरसाईं। उसी दौरान स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती से मुलाकात हुई और हिंदुत्व समर्थक कलाकारों-संतों को मिलाकर संस्कृति परिषद शुरू करने का फैसला लिया गया। वह परिषद सफल रही। मोदी प्रधानमंत्री बने और परिषद अब संस्कृति संसद के रूप में विशाल हो गई है।
उन्होंने कहा कि तीन दिन में सात हजार से अधिक युवा यहां हिंदुत्व और सनातन का सटीक ज्ञान लेकर जाएंगे। देवधर ने पश्चिमी ‘जेन-जी’ जैसी अवधारणाओं को बेवकूफी करार देते हुए कहा कि युवा स्वाभाविक रूप से विद्रोही होते हैं। माता-पिता की गलतियों और व्हाट्सऐप युग में गलत ज्ञान पहुंचने से युवा भटक गए हैं।
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