जागरण संवाददाता, बलिया : सिकंदरपुर में कक्षा पांच की छात्रा स्वीटी 13 साल की अल्पआयु में पाठशाला चला रही है, यहां वह शिक्षक है। गांव के लोग भी उसकी प्रतिभा का लोहा मान रहे हैं। चक हाजी उर्फ शेखपुर निवासी छात्रा के पिता खेती से अपना परिवार चलाते हैं। माता शैल कुमारी गृहिणी हैं। छात्रा को एक भाई और तीन बहने हैं। वह सभी से छोटी है। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। गरीबी की आंगन में पल रही बिटिया के मन में दूसरों की जिंदगी संवारने की सोच है। इस समय वह गांव के करीब 36 बच्चों को रोज निश्शुल्क शिक्षित कर रही है। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को लगन से सारे विषय पढ़ा रही है।

स्वीटी ने बताया कि वह दो साल पहले एक दिन स्कूल से पढ़ाई करके घर लौटती थी तो आसपास के बच्चों की गड़बड़ स्थिति देख दुखी होती थी। उनके माता-पिता भी उन पर विशेष ध्यान नहीं देते। अचानक एक दिन उसने अपने घर का बरामदा में कुछ बच्चों को बुलाकर पढ़ाने लगी, बच्चों में काफी बदलाव महसूस किया। उन बच्चों ने घर जाकर बताया कि दीदी ने आज बहुत अच्छा पढ़ाया। दूसरे दिन से उनके माता-पिता बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजने लगे। इससे मुझे फायदा यह होता है कि उनको पढ़ाने से मेरे खुद के ज्ञान में वृद्धि होती है। पढ़ने आने वाले बच्‍चों को भी काफी अच्‍छा लगता है।

मेधावी ही नहीं साहसी भी है छात्रा

छात्रा मेधावी होने के साथ वह साहसी भी है। इस उम्र में ही वह अकेली ट्रेन से दिल्ली तक अपने चाचा से मुलाकात करने चली जाती है, और वह लौट भी आती है। छात्रा ने बताया कि सफर में यात्रा के नियमों से अवगत होने के चलते कोई दिक्कत नहीं होती है। पिता सरकार बहादुर ने बताया कि इस उम्र में ही प्रतिभा देख सुकून मिलता है। एक दिन मेरी बिटिया मेरा नाम रोशन करेगी।

Edited By: Saurabh Chakravarty