चेन पुलिंग किसी और ने की, जुर्माना रेलवे ने किसी और से वसूला, सोशल मीडिया पर सामने आई कहानी
बनारस से द्वारका जा रहे एक यात्री को दूसरों द्वारा की गई चेन पुलिंग का खामियाजा भुगतना पड़ा। उसे न ...और पढ़ें

चेन पुलिंग किसी और ने की, रेलवे ने यात्री से वसूला जुर्माना: सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी।
HighLights
बनारस से द्वारका जा रहे यात्री को हुई परेशानी।
दूसरों की चेन पुलिंग का आरोप यात्री पर लगा।
यात्री को 500 रुपये जुर्माना और कोर्ट जाना पड़ा।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। सोशल मीडिया हैंडल 'खगड़िया जंक्शन' से बनारस से गुजरात गए यात्री की कहानी साझा की गई है जिसमें पुलिस की कार्यशैली के तर्ज पर रेलवे प्रशासन द्वारा रस्सी को सांप बनाने की कहानी साझा की गई है। जिसमें उसे ना सिर्फ कोर्ट का चक्कर काटना पड़ा बल्कि जुर्माना भी भरना पड़ गया।
बताया कि यात्रा के लिए वह बनारस से द्वारका जाने के लिए ट्रेन नंबर 22970 में सफर कर रहा था। सीट गेट के बिल्कुल पास थी। ट्रेन में बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार सफर कर रहे थे, जो राजकोट आदि जगहों पर काम करने के लिए जा रहे थे। ट्रेन में इतनी ज्यादा भीड़ थी कि लोग सीटों पर, सीटों के नीचे और गेट के पास भी बैठे हुए थे। पूरी यात्रा के दौरान ट्रेन बहुत ज्यादा भरी हुई थी।
इस दौरान ट्रेन में लगातार चेन पुलिंग हो रही थी। लगभग हर 100–200 किलोमीटर के बाद किसी न किसी जगह ट्रेन की चेन खींच दी जाती थी और ट्रेन को रोक दिया जाता था। इसके बावजूद कई बार न तो आरपीएफ का कोई कर्मचारी आता था और न ही कोई टीटी या अन्य जिम्मेदार अधिकारी इसकी जांच करने के लिए आता था। ट्रेन में बहुत ज्यादा भीड़ थी।
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कई मजदूर रिजर्व सीटों पर जबरदस्ती बैठ जाते थे और सो जाते थे। सीटों को लेकर यात्रियों के बीच विवाद भी हो रहे थे। इन सबकी शिकायतें रेलवे की मदद शिकायत व्यवस्था के माध्यम से की जाती थीं, लेकिन शिकायत करने के बाद भी कोई मौके पर नहीं आता था और कोई उचित सुनवाई होती हुई दिखाई नहीं दे रही थी।
जब ट्रेन अहमदाबाद से निकल गई, तब वह सोने चला गया। उस समय तक ट्रेन में काफी भीड़ थी। रात में ट्रेन राजकोट पहुंची, लगभग 12–1 बजे के आसपास। राजकोट स्टेशन पर जो यात्री राजकोट में उतरने वाले थे, वे उतर गए। उनमें बड़ी संख्या में मजदूर भी थे। यात्री के अनुसार, उनमें कुछ ऐसे लोग भी थे जो बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। राजकोट के बाद ट्रेन अचानक काफी खाली हो गई।
जब नींद खुली और खंभलिया स्टेशन आने वाला था, तब देखा कि ट्रेन लगभग पूरी तरह खाली थी। तीन लोग सफर कर रहे थे और द्वारका तक पूरा रिजर्वेशन था। तीन सीटें थीं—एक लोअर, एक साइड लोअर और एक अपर बर्थ। इसके अलावा एक दूसरी लोअर सीट पर एक पति-पत्नी दोनों एक ही सीट पर लेटे हुए थे। जब ट्रेन खंभलिया स्टेशन पहुंची, वहां ट्रेन का स्टॉपेज था और ट्रेन खंभलिया स्टेशन पर रुकी। उस समय सीट के पास जो अनजान पति-पत्नी सो रहे थे, उन्हें खंभलिया स्टेशन पर उतरना था, लेकिन वे सोते रह गए।

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जब खंभलिया स्टेशन से ट्रेन खुल गई और ट्रेन स्टेशन से आगे निकलने लगी, तब उस व्यक्ति की नींद खुली। उसे समझ आया कि ट्रेन खंभलिया से निकल चुकी है। वह ट्रेन से उतरने के लिए तुरंत चेन पुलिंग करने लगा। उसने सीट के पास लगी चेन खींचने की कोशिश की, लेकिन वह चेन नहीं खिंची। इसके बाद वह आगे-पीछे गया और दूसरी जगह से चेन खींच दी। चेन पुलिंग के कारण ट्रेन रुक गई।
चेन पुलिंग के बाद पीछे से ट्रेन मैनेजर हमारे स्लीपर कोच में आए। उस समय वह जाग रहा था। ट्रेन मैनेजर ने पूछा कि चेन किसने खींची है। उन्हें पूरी सच्चाई बताई कि सीट के पास दो अनजान लोग, एक पति-पत्नी, सो रहे थे। ट्रेन मैनेजर ने मेरी बात सुनी और मेरी सीट नंबर अपने मेमो में दर्ज कर लिया। इसके बाद ट्रेन वहां से चली और वह द्वारका पहुंच गए।
द्वारका पहुंचने के बाद रेलवे की तरफ से एक अनजान नंबर से फोन आया। बताया गया कि ट्रेन की चेन पुलिंग की है। यह सुनकर यात्री बहुत हैरान हो गया। इसके कुछ देर बाद द्वारका आरपीएफ की तरफ से भी फोन आया। उन्होंने पूछा कि वह कहां हैं। सच-सच बता दिया कि वह द्वारका में ही हैं। उन्होंने कहा कि आप यहां आ जाइए, हम सिर्फ आपका स्टेटमेंट लेंगे और आपको छोड़ देंगे।
उन्हें पूरी घटना बताई कि चेन पुलिंग नहीं की थी। इसके बावजूद वहां दबाव बनाया जाने लगा और कहा गया कि चेन पुलिंग की है और जुर्माना भरना पड़ेगा। अंततः यह स्वीकार करवाया गया कि चेन पुलिंग की है और मुझसे 500 का जुर्माना लिया गया। इसके बाद द्वारका कोर्ट ले जाया गया और वहां जज के सामने पेश किया गया। वहां भी कहा गया कि बस वहां जाकर "हां" बोलना है और 500 का फाइन देना है।
