वाराणसी, जेएनएन। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने शताब्दी वर्ष में कदम रख दिया है। काशी विद्यापीठ 10 फरवरी 2021 को अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लेगी। शताब्दी वर्ष में पूरे साल विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। प्रत्येक कार्यक्रम में काशी विद्यापीठ की स्थापना के महत्व से लोगों को रूबरू कराया जाएगा। विद्यापीठ प्रशासन शताब्दी वर्ष को भव्य रूप देने में जुटा हुआ है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा स्थापित इस विश्वविद्यालय ने शताब्दी साल को यादगार बनाने के लिए साल भर होने वाले अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए खाका खींच लिया है। यानी सन् 2020 से स्थापना दिवस तक पूरे साल कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों सहित अन्य संस्थाओं व सरकार के सहयोग से होने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। वहीं, काशी विद्यापीठ को ऐतिहासिक महत्व वाली संस्था का दर्जा दिए जाने को लेकर प्रस्ताव भी यूजीसी को फिर से भेज दिया गया है। 

50  छात्रों से हुई शुरुआत

स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली काशी विद्यापीठ की स्थापना वसंत पंचमी के दिन 10 फरवरी 1921 में हुई थी। यहां सबसे पहले आचार्य कृपलानी के साथ पचास छात्रों ने दाखिला लिया था तो शिक्षकों में भारतरत्न डा. भगवान दास, समाजवादी चिंतक आचार्य नरेंद्र देव, श्रीप्रकाश, आचार्य बीरबल, पूर्व सीएम डा. सम्पूर्णानंद, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल रघुकुल तिलक जैसे कई नाम हैं। इसके संचालन से जुड़ी कमेटी में मुंशी प्रेमचंद, पं.जवाहर लाल नेहरु, पुरुषोतम दास टंडन, लाला लाजपत राय, जमुनालाल बजाज, दामोदर जोशी और कृष्णकांत मालवीय जैसे दिग्गज रहे थे। 

परिसर में ठहरे थे बापू

सन् 1934 में 26 जुलाई से 02 अगस्त तक बनारस में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यकारिणी कमेटी और केंद्रीय हरिजन सेवक संघ के अधिवेशन के दौरान महात्मा गांधी ने यहां विश्राम भी किया था। मानविकी संकाय में आज भी वो कमरा है, जहां बापू अधिवेशन के  दौरान रूके थे। अब 2020 की शुरूआत होते ही विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के 100वें साल में प्रवेश कर गया है। ऐसे में पूरे साल भर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित होंगे। सन् 2021 में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम होगा।

Posted By: Abhishek Sharma

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस